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उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले के काज़िये शहर कारी फरीद उद्दीन ने कहा रमजान का महीना मुस्लमानों का पवित्र व इबादत का महीना होता है। रमजान अर्बी भाषा के शब्द रम्ज़ से बना है। जिसका अर्थ है। आग उर्दू मे इसे रोजा कहते है। जिस तरह आग कीं लौ से सोने को शुद्ध चमकीला बनाया जाता है। इसी तरह इन्सान को इस महीने रोजे रखकर उसकी तमाम बुराइयों को निकाल कर पाक इन्सान बनाया जाता है। ताकी वह समाज मे एक नेक इन्सान बन सके और दुनिया मे कामयाब रहे काज़ी शहर कारी फरीद उद्दीन कादरी ने कहा कि जिस तरह खाने पीने और कुरबत से दूर रहने का नाम रोजा़ है इसी तरह और भीं चीजे जिनसे परहेज जरूरी है ताकि रोजा़ कीं बरकत मुकम्मल तौर पर हासिल हो मसलन 1- आँख का रोज़ा कीं आँख से ना-महरम (अपरिचित) और गलत चीजों को ना देखा जाए, 2 – जबान का रोजा़
कीं जबान से बेहूदा बात, झूठ, गीबत, चुगली और ऐसी बाते ना सर्जद हों जो अल्लाह ताला कीं नाराजगी का बाइस बने, 3 – कान का रोज़ा ये है कीं कान से झूठ, गीबत, चुगली, बुरी बाते या हराम अशार ना सुने जाए, 4 – हाथ, पाओ का रोजा ये है कीं दोनों ऐसे कामों से दूर रखे जिस से अल्लाह और उसके रसूल नाराज हो काज़ी शहर कादरी ने कहा कि इस माह मे रोजा और तिलावत के साथ साथ जकात, सदकात और खैरात जरूर करे आप के रिश्तेदारों पडोस या मोहल्ला मे जो गरीब और मिसकीन हों उन कीं मदद करे और अल्लाह ताला कीं राह में 1 खर्च कर के 70 गुना ब्लकि उससे भीं ज्यादा हासिल करे काज़ी शहर ने कहा कीं जो सेहत मंद और तंदरुस्त हो वो दिन मे रोज़ा और रात मे तरावी अदा करे उन्होंने सभी धर्मों के लोगों से अपील किया कीं आपसी भाई चारा काएम रखते हुए सभी त्योहारों को मिल जुल कर मनाए ।

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