उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले में शहर के एलआईसी परिसर में बृहस्पतिवार को ऑल इंडिया इंश्योरेंश इम्प्लाइज यूनियन (AIIEU) के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों ने ताला बंद कर हड़ताल करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में नारेबाजी की और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर रोष जताया। हड़ताल का नेतृत्व कर रहे यूनियन के जिला अध्यक्ष रामसिंह यादव ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के हितों की लगातार अनदेखी कर रही है। उन्होंने मांग की कि एलआईसी में सौ प्रतिशत एफडीटी (फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट) की अनुमति को तत्काल वापस लिया जाए, क्योंकि इससे सार्वजनिक क्षेत्र की इस प्रतिष्ठित संस्था के निजीकरण का रास्ता साफ होता है और कर्मचारियों की नौकरी व भविष्य दोनों खतरे में पड़ जाते हैं। जिलाध्यक्ष ने आगे कहा कि एलआईसी में वर्षों से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पद रिक्त पड़े हैं, जिससे काम का अत्यधिक दबाव मौजूदा कर्मचारियों पर पड़ रहा है और सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने मांग की कि शीघ्र ही इन पदों पर नियमित भर्ती की जाए, ताकि बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिल सके और कर्मचारियों को राहत मिले। प्रदर्शनकारियों ने चार श्रम कानूनों (लेबर कोड) को भी कर्मचारी विरोधी बताते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि ये कानून श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करते हैं और नौकरी की सुरक्षा को खत्म करते हैं। साथ ही कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को पुनः लागू करने की मांग उठाई और कहा कि नई पेंशन प्रणाली (एनपीएस) से भविष्य असुरक्षित हो गया है। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा। यूनियन नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ एलआईसी कर्मचारियों का नहीं, बल्कि पूरे सार्वजनिक क्षेत्र को बचाने की लड़ाई है। इस मौके पर यूनियन के पूर्व अध्यक्ष मनमोहन सिंह, सचिव दिक्षांश साहू, सालनी देवी, रितेश, सरद गुप्ता, अनिल तिवारी सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।
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