उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले में आकांक्षी जनपद में प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास (ई ० सी ० डी ०), संवेदनशील परवरिश और माता-पिता की सहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित ‘जीवन के प्रथम 1000 दिवस’ परियोजना के दूसरे चरण के अंतर्गत चार दिवसीय प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 23, 24, 26 एवं 27 अक्टूबर 2026 को आयोजित किया जा रहा है। इसमें बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के लगभग 89 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। वर्ष 2022 से संचालित इस परियोजना का नेतृत्व जिला प्रशासन, उत्तर प्रदेश सरकार के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इसके क्रियान्वयन में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। परियोजना को वैन लीर फाउंडेशन तथा विक्रमशिला एजुकेशन रिसोर्स सोसायटी के तकनीकी सहयोग से संचालित किया जा रहा है। जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स के निर्देशानुसार तथा मुख्य विकास अधिकारी पवन कुमार मीना के नेतृत्व में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दोनों विभागों के लिए प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स का एक सक्षम समूह तैयार करना है। ये प्रशिक्षक आगे जमीनी स्तर पर कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कर्मियों एवं अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स को नियमित विभागीय समीक्षा बैठकों और प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षित करेंगे। परियोजना का विशेष जोर बच्चे के जीवन के प्रथम 1000 दिनों—गर्भधारण से लेकर बच्चे के दूसरे जन्म दिवस तक बेहतर स्वास्थ्य, पोषण, प्रारंभिक सीखने के अवसर, संवेदनशील परवरिश तथा माता-पिता के समग्र सहयोग को सुनिश्चित करने पर है। इसका उद्देश्य परिवार, समुदाय और सरकारी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। दीप प्रज्वलन के साथ हुआ प्रशिक्षण का शुभारंभ प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. इस्तियाक अहमद, वैन लीर फाउंडेशन के वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक अनुभव गर्ग, विक्रमशिला एजुकेशन रिसोर्स सोसायटी की कार्यक्रम प्रबंधक दूर्वा घोष तथा जिला कार्यक्रम प्रबंधक अजय लावरे ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। देश के विशेषज्ञ दे रहे हैं प्रशिक्षण इस चार दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिल्ली से आई प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास ई ० सी ० डी ० विषय विशेषज्ञ डॉ. अनुभा राजेश, लखनऊ विश्वविद्यालय के सामाजिक कार्य विभाग की प्रोफेसर डॉ. रूपा शंकर तथा ओडिशा से आई ई ० सी ० डी ० विषय विशेषज्ञ प्रियदर्शिनी मोहंती विभिन्न प्रशिक्षण तकनीकों के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रशिक्षित कर रही हैं। प्रशिक्षण को व्यावहारिक, सहभागी और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिभागियों को विभिन्न विषयों पर आधारित प्रशिक्षण सामग्री एवं मॉड्यूलर किट प्रदान की गई है। प्रशिक्षण सामग्री में सात प्रमुख विषयों पर आधारित मॉड्यूल के साथ ‘नींव’ फ्लिपबुक तथा ‘परवरिश की चौपाल’ और ‘परवरिश का आंगन’ जैसी सामुदायिक गतिविधियों के आयोजन से संबंधित पाठ्य सामग्री शामिल है। प्रशिक्षण सत्रों के दौरान विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियों, संवादात्मक गतिविधियों और विभिन्न प्रशिक्षण तकनीकों के माध्यम से बच्चों के मस्तिष्क विकास के विभिन्न आयामों, प्रारंभिक सीखने की प्रक्रिया और संवेदनशील परवरिश के महत्व को विस्तार से समझाया। जमीनी स्तर पर बेहतर सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण पहल इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से तैयार होने वाले मास्टर ट्रेनर्स विभागीय कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य, पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और अभिभावकीय सहयोग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों एवं समुदायों में छोटे बच्चों और उनके परिवारों तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाने तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास को जन आंदोलन का स्वरूप देने में सहायता मिलेगी। समूचे प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रबंधन एवं तकनीकी सहयोग परियोजना क्रियान्वयन संस्था विक्रमशिला एजुकेशन रिसोर्स सोसायटी की ओर से कार्यक्रम अधिकारी दिव्या भारती एवं आदर्श आर्य द्वारा प्रदान किया जा रहा है।
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