उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले के जहानाबाद विकास खंड देवमई के द्वारिकापुर जट्ट गांव में धनुष यज्ञ लीला का आयोजन किया गया। जहाँ बड़ी संख्या में रामलीला मैदान में लोगों की भीड़ पहूँची। राजा के दरबार में देश और विदेश से आए हुए राजाओं ने धनुष तोड़ने के लिए पुरा प्रयास किया गया है। लेकिन धनुष का एक कोना भी हिला नही सकें। तभी भगवान राम ने अपने गुरु जी आदेश लिए और धनुष को एक झलक में धनुष दो धड में अलग हो गया। सीता ने भगवान राम को वरमाला पहनाई। वहां मौजूद लोगों ने पुष्प वर्षा की धनुष टूटने की सूचना पर मिथिला पहुंचे भगवान परशुराम क्रोधित होकर महाराज विधेयराज से धनुष तोड़ने वाले का नाम पूछते हैं। इसी बीच परशुराम और लक्ष्मण के बीच मार्मिक तीखा संवाद होता है। जो सुबह तक चलता है। धनुष टूटने की जानकारी मिलते ही परशुराम मिथिला पहुंचे। और शिव धनुष तोड़ने वाले को अपना शत्रु बताया कर युद्ध करने के लिए ऐलान किया। इसके बाद लक्ष्मण परशुराम के बीच चार घंटे तक वेद शास्त्रों का संवाद चलता रहा। संवाद के दौरान लक्ष्मण द्वारा कहे गए “बहुत धनुही तोरी लरिकाई, कबहुं न अस रिषि कीन्हि गोसाईं “आऊंगा लक्ष्मण का यह शब्द भगवान परशुराम को और क्रोधित कर देता है । दोनों के बीच आध्यात्मिक और मार्मिक तीखा संवाद सुबह तक चलता रहता है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की भूमिका में सुमित शुक्ला व लक्ष्मण की भूमिका में उदित शुक्ला तथा परशुराम की भूमिका में सर्वेश पांडेय रहे जबकि मंडलाधीश रोहित जी रहे। इस मौके पर माधव सिंह लालू ओमर शीलू शुक्ला मोहिनी शुक्ला गोविंद विपिन कुमार अंशु शिवम शुक्ला पप्पू शुक्ला शिव शंकर आशीष,अरुण आदि लोग मौजूद रहे।
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