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उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिला अस्पताल में जगह-जगह लिखा हुआ है कि अस्पताल में सभी मरज़ो की दवाएं उपलब्ध है किसी के कहने पर बाहर से दवा म खरीदें। यह बात शिर्फ़ दीवारों पर लिखी हुई अच्छी लगती है। मगर यहाँ हकीकत कुछ और है जैसे ही मरीज़ जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में इलाज कराने पहुंचता है। तुरन्त मरीज़ों के परिजनों का खुले आम शोषण शुरू हो जाता है। मरीज़ के परिजनों को एक छोटी सी परची देकर बाहर स्टोर से मोटे कमिसन वाला इंजेक्शन लाने को कहा जाता है। जिसकी कीमत मरीज़ के परिजन को अदा करनी पड़ती है। और यहाँ के ज़िम्मेदारों के कान पर जूँ तक नही रेंगती है।

आपको बताते चले हुसैनगंज थाना क्षेत्र के अहमदपुर अचाकापुर गाँव निवासी चंद पाल की 40 वर्षीय पत्नी चंद्र कली गाँव के समीप पैदल किसी काम से जा रही थी। तभी रास्ते से निकले ट्रैक्टर ने उसको टक्कर मार दिया। ट्रैक्टर की टक्कर से चन्द्र कली घायल हो गई हादशे की जानकारी उसके परिजनों को हुई तो तुरन्त परिजन घायल अवस्था मे उसको इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहाँ डॉक्टर उसका इलाज कर रहे थे तभी ट्रामा सेंटर में मौजूद स्टॉप द्वारा उसके परिजनों से बाहर स्टोर से मोटे कमिसन वाला इंजेक्शन लाने को कहा गया। परिजन बाहर स्टोर से इंजेक्शन लेकर आए। जिसकी कीमत मरीज़ के परिजनों को 750 रुपए अदा करनी पड़ी। मामला जब पत्रकारों के संज्ञान में आया तो ट्रामा के स्टॉप द्वारा मरीज़ और उनके परिजनों को बिना इलाज किए ट्रामा सेंटर से भगा दिया गया।
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