उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले के सदर अस्पताल में स्थित ट्रामा सेंटर में एक बृद्ध की मौत पर गलत इलाज का आरोप लगाते हुए परिजनों ने जमकर हंगामा किया। हंगामे की जानकारी होते ही मौके पर पहुंचे सीएमएस को भी मृतक के परिजनों ने नही बख्शा उनसे भी बदसलूकी करने पर उतारू हो गए जिसकी सूचना सीएमएस ने पुलिस को दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

आपको बताते चले थरियांव थाना क्षेत्र के चक रसूलाबाद गाँव निवासी सर्वेश अपने पिता राम सिंह को साकारी एम्बुलेंस से लेकर जिला अस्पताल पहुंचा मरीज़ राम सिंह को साँस लेने में बहुत ज़्यादा दिक्कत हो रही थी। ट्रामा सेन्टर में जिस डॉक्टर की डियूटी थी वह अपनी ज़िम्मेदारी एक जूनियर डॉक्टर के भरोसे छोड़कर मौके पर मौजूद नही मिले। वह अपने चेम्बर मे बैठ कर सुबह से ओपीडी कर रहे थे। मौके पर मौजूद डॉक्टर ने मरीज़ का इलाज सुरु किया। हालत ज़्यादा खराब होने के चलते मरीज़ की मौत हो गई। मरीज़ की मौत की सूचना मिलते ही मौके पर जिला अस्पताल के सीएमएस ने पहुंच कर परिजनों को समझाने का प्रयास किया। परिजनों का हंगामा बढ़ता देख पुलिस को घटना से अवगत कराया। मौके पर पहुँची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मर्चरी हाउस में रखवा दिया। वही जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर आर० एन० गुप्ता ने बताया जिस मरीज़ के परिजनों ने गलत इलाज के नाम पर हंगामा किया है। उस मरीज़ की हालत बहुत ही खराब थी उसको साँस ले लेने में बहुत ज़्यादा दिक्कत हो रही थी। यहाँ आने के बाद उसको ऑक्सीजन वगैरा लगा कर उनका इलाज सुरु किया गया था। उसी बीच उसकी मौत हो गई। परिजनों के आरोप पर शव को मर्चरी हाउस में पोस्टमार्टम के लिए रखवा दिया गया है रिपोर्ट आने पर मौत का कारण पता चलेगा।

अस्पताल में इलाज के लिए अगर मरीज़ आएगा तो वह ठीक भी हो सकता है मौत भी हो सकती है। मगर सवाल यह उठता है अगर जिस डॉक्टर की जहाँ डियूटी लगी है आखिर वह वहाँ न होकर दूसरी जगह क्यो डियूटी करता है। इसके पीछे क्या वजह है बाहर की दवाएं लिखने का उद्देश्य तो नही है यह भी जाँच का विषय है। और ऐसे डॉक्टरों को चिन्हित कर उन पर कार्यवाई की ज़रूरत है।

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