उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले में इस समय झोला छाप डॉक्टर खूब फल फूल रहे है वजह स्वास्थ विभाग की लचर ब्यवस्था। जिसके चलते शहर से लेकर गाँव देहात तक झोला छाप डॉक्टर का राज है। और आये दिन कोई न कोई इनका शिकार बन जाता है। और झोला छाप डाक्टर की वजह से अपनी ज़िंदगी और मौत के बीच झूलता रहता है। हालत सुधर ने के बजाए जब बद से बदतर हो जाते है तो जिला अस्पताल की शरण मे पहुंचता है।
ऐसा ही एक मामला जिले के मलवा थानां क्षेत्र के कुरुस्ती कला गांव का है जहां गाँव निवासी लाल बहादुर का 32 वर्षीय पुत्र जितेंद्र के पैर में चोट लग गई थी। जिसका थानां क्षेत्र के उमेदपुर गाँव निवासी झोला छाप डॉक्टर सन्तोष उसको भरोसे में लेकर इलाज शुरू कर दिया। झोला छाप डॉक्टर के इलाज शुरू करने के बाद उसकी तकलीफ कम होने के बजाए और बढ़ गई। उसकी जांघ में काफी दूर तक इन्फ़ेक्सन फैल गया। झोला छाप डॉक्टर सन्तोष नाई उसको समझता रहा की ठीक हो जाएगा। हालत जब बहुत खराब हो गए तो पीड़ित जितेंद्र की माँ श्यामा देवी उसको सरकारी एम्बुलेन्स से जिला अस्पताल लेकर पहुंची। जहाँ ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर जितेंद्र की हालत गम्भीर देख उसको कानपुर के लिए रेफर कर दिया। खबर लिखे जाने तक जितेंद्र व उसकी माँ सरकारी एम्बुलेन्स के इंतेज़ार में जिला अस्पताल में मौजूद थे।
अब सवाल उठता है आखिर तब तक स्वास्थ विभाग के आला अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति उदासीन रहेंगे। कब अपनी जिम्मेदारियों के प्रति संजीदा होंगे। जब की सरकार लोगो के स्वास्थ को लेकर काफी गंभीर हैं। स्वास्थ को लेकर तरह तरह की योजनाए चला रही हैं। मगर सरकारी नुमाइंदे सरकार की इन योजनाओ को अमल आने से पहले ही उसका गला घोंटने का काम कर रहे है। तभी तो गाँव से लेकर शहर तक झोला छाप डॉक्टर फलफूल रहे है। सरकार तो अपना काम कर रही हैं मगर इसका लाभ ग्रामीण क्षेत्रो में बिना डिग्री के झोला छाप डाक्टर उठा रहे हैं। और खुले आम लोगो की जिंदगी से खेलते नज़र आ रहे हैं। और जिले के आला अधिकारी मौन धारण किये हुए है जैसे उनका कोई लेना देना नही है।
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