उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले में आँगनवाड़ी केंद्रों में सहायिकाओं की भूमिका एवं कार्य दायित्व के महत्त्व का आँकलन है अत्यंत आवश्यक आकांक्षी जनपद में प्रथम बार आँगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत सहायिकाओं की सेवाओं के महत्त्व को रेखांकित करने की विभाग की पहल से पोषण,शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं में होगा सुधार मालवा विकास खंड मुख्यालय में दिनांक 12 अक्टूबर 2023 को आँगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत सहायिकाओं की क्षमता अभिवृद्धि एवं विभाग की छै प्रमुख सेवाओं के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका एवं कार्य दायित्व के महत्त्व विषय पर क्षमतावर्धन कार्यक्रम का आयोजन बाल विकास परियोजना अधिकारी सुरजीत सिंह के नेतृत्व में किया गया I आँगनबाड़ी सहायिकाओं के इस उन्मुखीकरण कार्यक्रम में बाल विकास परियोजना अधिकारी ब्लाक हथगाम संतोष कुमार पाल ,सेक्टर पर्यवेक्षक सुनीता राठौर के साथ सहयोगी विकास संस्थाओं के प्रतिनिधि बर्नाड वैन लीर फाउंडेशन के जिला कार्यक्रम समन्वयक अनुभव गर्ग , पीरामल फाउंडेशन के जिला प्रमुख अनवर हुसैन खान, सी थ्री संस्था के ब्लाक प्रमुख विमल सैनी, अलाइव एन्ड थ्राइव संस्था के प्रतनिधि चंद्रशेखर अग्रवाल आदि ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए। उक्त कार्यशाला की शुरुवात पर्यवेक्षक सुनीता राठौर के द्वारा समस्त उपस्थित प्रतिभागियों , बाल विकास परियोजना अधिकारी तथा विकास संस्थाओं से आये हुए विषय विशेषज्ञों के स्वागत भाषण से हुई। तत्पश्चात बाल विकास परियोजना अधिकारी सुरजीत सिंह के द्वारा विभाग में विकासखंड स्तर पर संचालित 282 आंगनबाड़ी केंद्रों में 239 सहायिकाओं के पद हैं, शेष 45 मिनी आँगनबाड़ी केंद्र हैं, जिसमें वर्तमान समय 181 कार्यरत सहायिकाओं के द्वारा दी जा रही सेवाओं की प्रशंसा करते हुए बताया की आंगनबाडी केंद्रों में उपलब्ध संशाधनों के रखरखाव सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हेतु सहायिकाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है , और सहायिकाओं की भूमिका को रेखांकित करना विभाग की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी है।

जिसके लिए विभाग के द्वारा उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया हैI बाल विकास परियोजना अधिकारी सुरजीत सिंह द्वारा सहायिकाओं की मुख्य ज़िम्मेदारियों को प्रमुखता के साथ स्पष्ट करते हुए सभी को निर्देशित किया गया की आँगनबाड़ी केंद्र खुलने के निर्धारित समय से आधा घंटे पूर्व केंद्र पर उपस्थित हो कर केंद्र में साफ़ सफाई , पीने के पानी की व्यवस्था , आँगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 03 से 06 वर्ष को ससमय सुरक्षित रूप से उनके घर से केंद्र तक व केंद्र से घर तक ले जाने का कार्य अत्यधिक ज़िम्मेदारी के साथ करने की आवश्यकता है I आँगनबाड़ी केंद्र के कार्य सम्पादित करने के बाद केंद्र की सफाई, भोजन से पूर्व एवं पश्चात बच्चों की मुहँ हाथ धुलवाना , खाद्य सामग्री की सुरक्षा ,वी एच एस एन डी , सामुदायिक कार्यक्रमों आदि की गतिविधियों हेतु गर्भवती /धात्री माताओं का मोबिलाइजेशन के साथ ही प्रत्येक केंद्र में प्रतिदिन सेवाओं के अनुरूप लक्षित लाभार्थियों की उपस्थिति को सुनिश्चित करने पूर्ण ज़िम्मेदारी सीधे तौर पर सहायिका की होगी I विभाग द्वारा जारी बिंदुवार निर्देश को प्रभावी रूप से लागू करने के साथ ही लापरवाही की दशा में अनुशासनात्मक कार्यवाई की बात से भी अवगत कराया I
कार्यशाला में नीति आयोग के निर्देशानुसार संचालित परियोजना जीवन के प्रथम 1000 दिवस (270 दिवस गर्भावस्था, 180 सिर्फ स्तनपान, 550 स्तनपान के साथ पूरक पोषण आहार व संवेदनशील देखभाल) पर प्रकाश डालते हुए जिला समन्वयक अनुभव गर्ग द्वारा बताया गया की मानव मस्तिष्क का विकास उक्त दिवसों में सबसे तेज़ गति से विकशित होता है। डब्ल्यू एच ओ के शोधों से निष्कर्ष निकला है कि बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिनों में मस्तिष्क का 90% विकास होता है, और इसका उसकी सेहत पर आजीवन प्रभाव पड़ता है। जीवन के ये प्रारंभिक वर्ष बड़े पैमाने पर घर पर व्यतीत होते हैं और सरकारी विभागों की सेवा सुविधाओं पर निर्भर होते हैं, और इस तरह माता-पिता और अन्य देखभाल करने वाले छोटे बच्चों के स्वस्थ विकास में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि माता-पिता और देखभाल करने वाले छोटे बच्चों का पालन-पोषण करने और उनके समग्र विकास को प्रोत्साहित करने के लिए पूरी तरह से सक्षम हों। विभाग एवं समुदाय के बीच एक संवेदनशील सम्बन्ध स्थापित करने में सहायिकाएं एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं I पीरामल फाउंडेशन के जिला प्रमुख अनवर हुसैन खान द्वारा बताया गया की आँगनवाड़ी भारत में माँ और बच्चों के देखभाल का एक प्रमुख केंद्र है। आंगनवाड़ी छोटे बच्चों की पोषण, स्वास्थय और शिक्षा संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए एकीकृत बाल विकास सेवाएँ के कार्यक्रम के रूप में ग्राम स्तर पर सरकार द्वारा समर्पित एक केंद्र है। आंगनवाड़ी 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों, किशोर युवतियों, गर्भवती महिलाओं तथा शिशुओं की देखरेख करने वाली माताओं की आवश्यकताओं की पूर्ति करती है।
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