उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले की खागा तहसील अंतर्गत ऐरायां विकास खंड के बैरहना गांव (मजरा रसूलपुर भंडरा) में पंचायत भवन निर्माण को लेकर भ्रष्टाचार के आरोपों ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। दर्जनों ग्रामीणों द्वारा पूर्व में सचिव और प्रधान पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की गई थी, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई थी। लेकिन अब बिना अधिकृत जांच टीम की मौजूदगी में पूर्व आरोपित सचिव द्वारा स्वयं निरीक्षण करने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों के अनुसार 04 फरवरी को जिला स्तरीय टीम ने मौके पर पहुंचकर पंचायत भवन निर्माण कार्य की जांच प्रारंभ की थी। इसके बाद 06 फरवरी को पूर्व सचिव कृष्णपाल सिंह यादव जूनियर इंजीनियर के साथ दोबारा गांव पहुंचे और शिकायत के क्रम में पंचायत भवन में नाप-जोख करते हुए केवल औपचारिकता निभाते नजर आए। आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी अधिकृत जांच टीम के की गई, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवन में मात्र करीब 300 वर्गफीट टाइल्स का ही कार्य किया गया है, जबकि फर्जी बिल और बाउचर के माध्यम से लगभग 3 लाख 26 हजार 158 रुपये का भुगतान निकाल लिया गया। ग्रामीणों ने इसे खुला भ्रष्टाचार बताते हुए अधिक भुगतान कर बंदरबांट का गंभीर आरोप लगाया है। इतना ही नहीं, पंचायत भवन के बगल में स्थित जूनियर हाई स्कूल के प्रधानाचार्य सहित करीब दो दर्जन ग्रामीणों ने लिखित रूप से यह आपत्ति दर्ज कराई है कि पंचायत भवन में प्लास्टर का कार्य वास्तव में कराया ही नहीं गया, जबकि अभिलेखों में इसका भुगतान दर्शाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस सचिव पर पहले से भ्रष्टाचार के आरोप हैं, उसी के द्वारा खुद जांच करना न्यायसंगत नहीं है और इससे सच्चाई सामने आने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच किसी अन्य सक्षम अधिकारी या बाहरी टीम से कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे पुनः जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
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