उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले के जहानाबाद कस्बे में स्थित प्राचीन सिद्ध पीठ मां अंबिका देवी मंदिर इन दिनों भक्तों का मां की पूजा आराधना के लिए खासा जमावड़ा लग रहा है इस सिद्ध पीठ मंदिर के लिए भक्तों मे मान्यता है कि यहां पहुंच कर जो भी देवी भक्ति नगाड़ा बजाकर मां के चरणों में माथा टेकता है तो इससे खुश होकर मां अपने भक्तों की सारी मुरादे पूरी करती हैं। कस्बा कोड़ा जहानाबाद के मोहल्ला क्योंटरा में स्थित जहानाबाद रोटी मार्ग के किनारे चौडगरा घाटमपुर हाईवे मार्ग से सौ मीटर दक्षिण में स्थित सिद्ध पीठ मां अंबिका देवी मंदिर मे लगे पत्थर के अनुसार इसका निर्माण ढाई सौ वर्ष पूर्व काशी राज ने करवाया था । मां की मूर्ति के पास लगे पत्थर में उर्दू व अन्य भाषा में कुछ लिखा हुआ है । जिसको पढ़ा नहीं जा सकता । लेकिन उर्दू भाषा का प्रयोग होने से यह साबित होता है कि यह मंदिर मुगलकालीन समय का है। मंदिर में स्थापित मां अंबिका देवी की मूर्ति अष्टधातु की है तथा मूर्ति के सामने भगवान् भोलेनाथ (शिव जी) विराजमान है।मंदिर परिसर में मुगलकालीन नक्काशी की झलक दिखाई देती है मंदिर में दो मुख्य दरवाजे हैं मंदिर के अंदर जाने के बाद तीन दिशाओं के लिए तीन दरवाजे लगे हैं। मंदिर परिसर में बजरंगबली नंदी बाबा व अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां विराजमान है। मां अंबिका देवी के दर्शन के लिए यूं तो प्रतिदिन मां के चरणों में माथा टेकने भक्त आते हैं। किन्तु दोनों नवरात्रों में मंदिर में देवी भक्तों की भारी भीड़ रहती है । चैत्र मास के नवरात्रों में इस मंदिर का विशेष महत्व है क्योंकि चैत्र मास के नवरात्र की अष्टमी और नवमी को विशाल जवारा निकालने के साथ ही मंदिर परिसर में मेला लगता है। तथा रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है । इस सिद्ध पीठ मंदिर की एक मान्यता है कि नागाडे़ की आवाज सुनकर मां अंबिका देवी खुश होती है जब भी कोई भक्त मां के दर्शन करने के लिए मंदिर आता है तो मां की मूर्ति के पास रखें नगाड़े में एक चोभ जरुर मारता है कहते हैं ऐसा करने से मातारानी खुश होती हैं । और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती है।
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