उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले में स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा शहीद डिप्टी कलक्टर हिकमत उल्ला ख़ाँ साहब के बलिदान दिवस पर संस्थान की ओर से हिकमत उल्ला खां पार्क में गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से रोशनी डाली। वक्ताओं ने कहा कि अंग्रेजों से बगावत करके उन्होने दस जून को जेल खोला और 32 दिन तक आजाद हुकूमत की और आज ही के दिन अंग्रेजों ने उनको फांसी देकर शहीद कर दिया था। गोष्ठी को संबोधित करते हुए शहीद डिप्टी कलक्टर हिकमत उल्ला सेवा संस्थान के अध्यक्ष मुहीउद्दीन एडवोकेट ने कहा कि 1857 के स्वतंत्रता आन्दोलन के विद्रोह के समय हिमतउल्ला साहब डिप्टी कलक्टर के पद पर तैनात थे। विद्रोह कर अंग्रेजों से बगावत कर दी थी। खागा के दरियाव सिंह व उनके पुत्र सुजान सिंह, जमरावां के शिवदयाल रघुवंशी व जोधा सिंह अटैय्या का साथ देकर दस जून को जेल खोल दिया और 32 दिन की आजाद हुकूमत की। मुख्य अतिथि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद रायजादा एडवोकेट ने बताया कि हमारे पूर्वजों ने अपने खून से सींच कर यह आजादी हासिल की है और आज ही के दिन 12 जुलाई को अंग्रेजों ने उनको कोतवाली गेट पर फांसी देकर शहीद कर दिया था। बहार महामंत्री बुद्ध प्रकाश सिंह ने कहा कि गद्दारों के कारण हिकमत उल्ला खाँ साहब गिरफ्तार हुए थे और नाना साहब ने हिकमत उल्ला खाँ साहब को जनपद का प्रशासक नियुक्त किया था। एक महीने की आजाद हुकूमत कायम की थी। एफ रहमान ने आजादी के मतवालों का बखान करते हुए बताया कि 12 जुलाई को बिलंदा के लशकरी बाग में जनरल हेवलाम व मेजर रेनाल्ड की सेना ने हिकमत उल्ला खाँ साहब को गिरफ्तार कर लिया और कोतवाली गेट पर फांसी दे दी। एक सप्ताह तक मुख्य द्वार पर उनका सिर लटकता रहा। सभी लोग शहीद स्थल कोतवाली पहुंचे और उनकी आत्मा की शांति हेतु दुआएं मांगी। इस मौके पर माजउद्दीन, माविया फारूकी, एहसान खान, सैय्यद नौशाद, अरसलान जाफरी, मो. कामिल, कमर खां एडवोकेट, मौलाना अब्दुल हमीद, अब्दुल मुईद कासमी, मो. आसिफ एडवोकेट, अब्दुल सुहैल भी मौजूद रहे।

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