उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले में सरकारी फाइलें अक्सर अटकती हैं, पर जब अटकाने की ‘कीमत’ मांगी जाए और ना कहने पर लात-घूंसे चल जाएं, तो भरोसा हिल जाता है। जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी यानी सीएमओ कार्यालय में सोमवार को ऐसा ही नजारा दिखा। एक निजी अस्पताल संचालक ने दफ्तर के कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं फाइल आगे बढ़ाने के लिए मोटी रकम की मांग, विरोध करने पर अभद्रता और मारपीट। अस्पताल संचालक अपनी फाइल के सिलसिले में सीएमओ ऑफिस पहुंचा था। आरोप है कि वहां उसे नियम-कानून नहीं, बल्कि पैसों की भाषा समझाई गई। फाइल क्लियर कराने के एवज में मोटी रकम मांगी गई। संचालक ने जब रकम देने से मना किया तो बात बहस से शुरू होकर हाथापाई तक पहुंच गई। पीड़ित का कहना है कि दफ्तर में ही उसके साथ मारपीट और बदसलूकी की गई। घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। पीड़ित की पत्नी शिवानी कोतवाली पहुंची और कर्मियों के खिलाफ लिखित शिकायत देकर कार्यवाई की मांग किया। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों चश्मदीदों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सच सामने लाने की कोशिश हो रही है। इस पूरे वाकये के बाद सवाल एक ही है। अगर फाइलें रिश्वत से चलेंगी तो सिस्टम पर भरोसा कौन करेगा? स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस जांच के बाद ही साफ होगा कि ये ‘फाइल का खेल है या सोची-समझी साजिश।
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