उत्तर प्रदेश फतेहपुर जनपद में संभावित सूखा की स्थिति के प्रभाव को कम करने एवं समय रहते आवश्यक तैयारियों की समीक्षा के उद्देश्य से जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स की अध्यक्षता में गांधी सभागार कलेक्ट्रेट में विभागवार समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि विभाग, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग, जल निगम शहरी व ग्रामीण, सिंचाई विभाग, पंचायतीराज विभाग, विद्युत विभाग, ग्राम्य विकास विभाग के अधिकरीगण के साथ-साथ समस्त खण्ड विकास अधिकारी जनपद द्वारा प्रतिभाग किया। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि सूखा की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें तथा शासन द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक विभाग प्राथमिकता के आधार पर सूखा से प्रभावित होने वाले विकास खण्डों अमौली, धाता, विजयीपुर, बहुआ व खजुहा में अपने स्तर पर सूखा संभावित स्थलीय चुनौतियों का पूर्व आकलन करते हुए समयबद्ध कार्ययोजना के अनुसार आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करे। अधिशासी अभियंता निचली गंगा नहर फतेहपुर प्रखण्ड फतेहपुर द्वारा अवगत कराया गया है, कि सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों को नहरों को सुचारू रूप से संचालित किये जाने हेतु पानी की डिमाण्ड भेज दिया गया है। सिंचाई विभाग के अन्तर्गत जनपद में कुल 876 तालाब हैं, जिसके सापेक्ष वर्तमान तिथि तक 392 तालाबों को भर दिया गया है, अवशेष 596 तालाबों को 15 जुलाई तक भर दिया जायेगा। वर्तमान जनपद क्षेत्रान्तर्गत संचालित नहरों के 244 टेलों में से 146 की नहरों की टेलफीड करा दी गयी है, अवशेष 98 नहरों की टेलों को 15 जुलाई तक फीड करा दिया जायेगा। खण्ड विकास अधिकारी के माध्यम से तालाबों के सत्यापन हेतु तत्काल ग्रामवार सूची जिला आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण को उपलब्ध कराये जाने के लिए निर्देशित किया गया। जिलाधिकारी ने उपनिदेशक, कृषि विभाग को किसानों को सूखा सहनशील फसलों, वैकल्पिक खेती एवं जल संरक्षण तकनीकों व प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ने के प्रति जागरूक करने तथा फसलों की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए। लघु सिंचाई विभाग को अतिशीघ्र राजकीय नलकूपों एवं अन्य सिंचाई संसाधनों की कार्यशीलता सुनिश्चित करने तथा आवश्यक मरम्मत कार्य सूखा व बाढ़ संभावित क्षेत्रों में शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में पेयजल व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल देते हुए जल निगम शहरी व ग्रामीण को क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न न होने पाए इसलिए सर्वप्रथम जनपद के सूखा संभावित विकास खण्डों में सरकारी योजनाओं के लक्ष्य को पूर्ण करने, अतिशीघ्र जिलाधिकारी कार्यालय के प्रांगण, सिविल कोर्ट व विकास भवन कार्यालय के समीप लगाये गये इण्डिया मार्का 2 हैण्डपम्पों व मरम्मत किये गये इण्डिया मार्का 2 हैण्डपम्पों की सूची जिला आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण,को तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये वही जिला पंचायतीराज अधिकारी, फतेहपुर को सूखा व बाढ़ संभावित क्षेत्रों में इण्डिया मार्का 2 हैण्डपम्पों के मरम्मत, रिबोर या नया बोर प्राथमिकता के आधार पर कराये जाने हेतु निर्देशित किया गया। समस्त खण्ड विकास अधिकारी को निर्देशित किया गया सभी अपने-अपने ब्लाकों में समस्त टैंकरों की सूची एकत्र कर लें और यदि खराब टैंकर्स हो तो तत्काल उसकी मरम्मत करा लें। विद्युत विभाग को सिंचाई एवं पेयजल योजनाओं के लिए निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा लघु सिंचाई के अन्तर्गत नलकूपों के ऊर्जीकरण हेतु कृषकों का ऑन लाइन आवदेन कराने के उपरान्त तत्काल उसके निस्तारण हेतु अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मण्डल, फतेहपुर को निर्देशित किया। पशुपालन विभाग को पशुओं के लिए चारा एवं पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा आवश्यकतानुसार पशु चिकित्सा शिविर आयोजित करने की योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। ग्रामीण विकास विभाग को जिला विकास अधिकारी व उपायुक्त श्रमरोजगार को मनरेगा के अंतर्गत जल संरक्षण, तालाबों के जीर्णोद्धार एवं अन्य जल संवर्धन कार्यों में तेजी लाने तथा तहसील सदर व बिन्दकी के बाढ़ संभावित गांवों में प्राथमिकता के आंधार पर खुले कुओं को ढ़कने व तालाब, पोखरों व नदियों के किनारे तत्काल डूबने से बचाव हेतु चेतावनी बोर्ड लगवाने के निर्देश दिए गए। वहीं राजस्व विभाग को वर्षा की स्थिति एवं जल स्रोतों की सतत निगरानी करते हुए नियमित रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को बाढ़ व सूखा संभावित विकास खण्डों के अन्तर्गत संचालित स्वास्थ्य केन्द्रों में सर्पदंश से बचाव हेतु पर्याप्त मात्रा में एन्टीवेनम के साथ-साथ डायरिया व अन्य जल जनित बीमारियों के नियंत्रण दवाओं को उपलब्ध कराने हेतु निर्देशित किया। बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि सूखा की स्थिति से निपटने हेतु किए जा रहे कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए तथा किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए, जिससे जनपद में जनजीवन एवं कृषि गतिविधियों पर न्यूनतम प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
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