उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले के जहानाबाद थाना पुलिस द्वारा फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर साइबर ठगी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर उससे जामा तलाशी से एक अदद मोबाईल बरामद किया। अभिमन्यु मांगलिक, पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान में, अपर पुलिस अधीक्षक के पर्यवेक्षण एवं पुलिस उपाधीक्षक बिन्दकी के नेतृत्व में जनपदीय साइबर सेल द्वारा प्रतिबिम्ब पोर्टल पर प्रदर्शित एनसीआरपी साइबर शिकायत संख्या 31906260140034 की जांच की गई। जांच के दौरान शिकायतकर्ता भारती चन्द्रपाल नरनवरे पुत्र चन्द्रपाल नरनवरे निवासी एम.आर.ए. मार्ग, बृहद मुम्बई सिटी, महाराष्ट्र से दूरभाष पर वार्ता करने पर ज्ञात हुआ कि अभियुक्त द्वारा स्वयं को सीबीआई अधिकारी बताकर, गूगल क्रोम पर अश्लील फिल्म देखने एवं उनके नाम पर शिकायत दर्ज होने का भय दिखाते हुए मोबाइल नम्बर 91XXXXXX से संपर्क कर उन्हें डरा-धमकाकर विभिन्न क्यूआर कोड के माध्यम से ₹28,540/- की साइबर धोखाधड़ी की गई थी। तकनीकी साक्ष्यों एवं मोबाइल नम्बर की लोकेशन के आधार पर उक्त नम्बर की लोकेशन ग्राम नरायनपुर मजरे कलाना, थाना जहानाबाद में प्राप्त हुई। मुखबिर की सूचना पर दिनांक 05.07.2026 को समय करीब 01:30 बजे अरोपी थाना क्षेत्र के नरायनपुर मजरे कलाना गाँव निवासी बाबू सिंह के 19 वर्षीय पुत्र धीरेन्द्र को उसके घर से गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक अदद मोबाइल फोन (IMEI नं. 868185074571266 एवं 868185074571274) बरामद किया गया। पूछताछ में आरोपी द्वारा अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर विभिन्न मोबाइल नम्बरों से टूकॉलर के माध्यम से व्यक्तियों की पहचान कर स्वयं को सीबीआई अधिकारी बताकर, अश्लील वीडियो देखने के नाम पर मुकदमे एवं गिरफ्तारी का भय दिखाना, पुलिस द्वारा मारपीट के फर्जी वीडियो एवं पुलिस अधिकारियों की फोटो लगी व्हाट्सएप डीपी का प्रयोग कर विश्वास में लेना तथा विभिन्न बैंक खातों एवं ऑनलाइन गेमिंग क्यूआर कोड के माध्यम से धनराशि ठगना स्वीकार किया गया। गिरफ्तारी एवं बरामदगी के आधार पर थाना जहानाबाद पर मु0अ0सं0 104/2026 धारा 318 (4)/351(2)/308(6) बीएनएस एवं 66D आईटी एक्ट पंजीकृत कर अभियुक्त को नियमानुसार माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। पूछताछ में धीरेन्द्र द्वारा बताया कि वह अपने गांव के अन्य साथियों के साथ मिलकर अज्ञात व्यक्तियों को व्हाट्सएप वॉइस कॉल कर स्वयं को सीबीआई अधिकारी बताता था। इसके बाद अश्लील वेबसाइट देखने के नाम पर मुकदमा दर्ज होने एवं गिरफ्तारी का भय दिखाकर पुलिस कार्रवाई से संबंधित वीडियो भेजते थे तथा विश्वास में लेने के लिए अपने साथियों से वरिष्ठ अधिकारी बनकर बात कराते थे। इसके उपरांत विभिन्न खातों एवं ऑनलाइन गेम के क्यूआर कोड भेजकर पीड़ितों से धनराशि ट्रांसफर कराते थे। प्राप्त धनराशि को विभिन्न वॉलेट एवं बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित कर एटीएम से नकद निकाल लेते थे तथा घटना के बाद उपयोग किए गए क्यूआर कोड एवं अन्य डिजिटल साक्ष्यों को मोबाइल से डिलीट कर देते थे।
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