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उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले में प्रदेश लेखपाल संघ ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन एसीओ एंटी करप्शन और विजिलेंस टीम द्वारा लेखपालों के विरुद्ध की जा रही फर्जी और दुर्भावनापूर्ण ट्रैप कार्यवाई के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। उपशाखा सदर के बैनर तले संघ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा है। साथ ही इसी गंभीर विषय के विरोध में और अयोध्या के निर्दोष लेखपाल उत्कर्षदीप को न्याय दिलाने की मांग को लेकर प्रदेश के सभी 75 जनपदों, 351 तहसीलों में लेखपालों ने थाना दिवस का बहिष्कार करते हुए एक दिवसीय कलम बंद हड़ताल एवं धरना प्रदर्शन किया। ज्ञापन में संघ ने बताया कि लेखपाल राजस्व विभाग का मेहनती, ईमानदार और जनता से सीधे जुड़ा अग्रिम पंक्ति का कर्मचारी है जो कठिन परिस्थितियों में पैमाइश, अतिक्रमण हटाने और शासन की योजनाएं घर-घर पहुंचाने का काम करता है। भूमि विवाद में अवैध कार्य न करने पर कई बार लोग रंजिशवश झूठे मामले में फंसाने की कोशिश करते हैं। संघ का आरोप है कि एसीओ टीम बिना शिकायत की वास्तविकता, शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि और लेखपाल के अधिकार क्षेत्र की जांच किए बिना ही ट्रैप कर रही है। 20 अगस्त 2026 को जनपद अयोध्या की तहसील सोहावल में लेखपाल उत्कर्षदीप के साथ हुई कार्यवाई ने पूरे संवर्ग को आहत कर दिया है। संघ का कहना है कि इस प्रकरण के सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो से गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि क्या वास्तव में रिश्वत मांगी अथवा स्वीकार की गई थी या षड्यंत्रपूर्वक फंसाने का प्रयास किया गया। ऐसी घटनाओं से लेखपालों में भय और असुरक्षा बढ़ रही है। संघ ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ भ्रष्टाचार के किसी भी रूप का समर्थन नहीं करता। यदि कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्यवाई हो, लेकिन किसी निर्दोष को निजी रंजिश, षड्यंत्र, झूठी शिकायत या जबरन ट्रैप से फंसाया जाना स्वीकार नहीं है। संघ ने मुख्यमंत्री से सहानुभूतिपूर्वक और न्यायोचित विचार करने की मांग की है-अयोध्या (सोहावल) प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच:लेखपाल उत्कर्षदीप के विरुद्ध हुई कार्यवाई की पुलिस विभाग से स्वतंत्र किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी/SIT से तत्काल जांच कराई जाए। सीसीटीवी फुटेज, वायरल वीडियो, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, शिकायत और प्री-ट्रैप प्रक्रिया सहित प्रत्येक तथ्य की समीक्षा हो और यदि षड्यंत्र पाया जाता है तो लेखपाल को तत्काल राहत दी जाए। ट्रैप से पहले अनिवार्य जांच और फर्जी ट्रैप पर रोक:भविष्य में किसी भी लेखपाल के खिलाफ ट्रैप से पहले शिकायत की सत्यता, शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि, रंजिश, निजी स्वार्थ और उद्देश्य की विस्तृत जांच अनिवार्य की जाए। यह भी देखा जाए कि कार्य लेखपाल के अधिकार क्षेत्र में है या नहीं। केवल मौखिक कथन पर ट्रैप न हो। जबरन जेब, वाहन या कक्ष में धनराशि रखकर या दलाल के माध्यम से फंसाने जैसी स्थितियों में बिना ठोस साक्ष्य के गिरफ्तारी पर रोक लगे। यदि शिकायतकर्ता या एसीओ अधिकारियों की भूमिका नियमविरुद्ध पाई जाए तो उनके विरुद्ध FIR, निलंबन और दंडात्मक कार्रवाई हो।स्पष्ट और कड़े (SOP) जारी हों:ACO एवं विजिलेंस विभाग के लिए ट्रैप कार्रवाई को लेकर स्पष्ट, पारदर्शी और जवाबदेह दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, जिससे निर्धारित प्रक्रिया और निष्पक्ष मानकों के अनुरूप ही कार्यवाई हो और कोई निर्दोष फर्जी ट्रैप का शिकार न हो। ज्ञापन पर तहसील अध्यक्ष हरि गोविन्द सिंह, तहसील मंत्री प्रदीप कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनुपम कुमार, कनिष्ठ उपाध्यक्ष रजत तिवारी सहित समस्त लेखपाल मौजूद रहे।
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