उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले के विकास खंड हसवा कस्बे में पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश-ए-मुबारक के अवसर पर में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी का जुलूस निकाला गया। खेलदार, मीरसदर, चौधराना, बाजार, सहित अन्य जगहों पर से निकलता हुआ जुलूस अपनी सादगी, अनुशासन और शालीनता के कारण लोगों के बीच जुलूस में शामिल छोटे-छोटे बच्चें और बुद्धजीवी लोगों कतारबद्ध होकर शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ रहे थे।वह दृश्य न केवल आकर्षक था बल्कि समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी दे रहा था। बच्चों ने बिना शोर-शराबे और हुड़दंग के जिस अनुशासन के साथ जुलूस में हिस्सा लिया। उससे यह संदेश नजर आ रहा था कि किसी भी धार्मिक आयोजन की खूबसूरती केवल उसकी भव्यता में नहीं।बल्कि उसके अदब, अनुशासन, शांति और सामाजिक जिम्मेदारी में होती है। दीनी दृष्टि से देखा जाए तो रसूल-ए-अकरम की सीरत इंसानियत, रहमत, नरमी, भाईचारे, पड़ोसी के हक और समाज में अमन कायम करने का संदेश देती है। इसलिए उनके जन्म की खुशी मनाते समय उनके बताए हुए अखलाक और किरदार को अपने जीवन में उतारना ही सबसे महत्वपूर्ण बात है। जुलूस में बच्चों की भागीदारी ने इसी सोच को एक खूबसूरत रूप में सामने रखा। दुनियावी दृष्टि से भी धार्मिक जुलूस समाज में सकारात्मक संदेश देने का माध्यम बन सकते हैं। जब कोई धार्मिक आयोजन कानून व्यवस्था का सम्मान करते हुए, आम लोगों की सुविधा का ध्यान रखते हुए और शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जाता है । तो वह समाज में धार्मिक सौहार्द और आपसी विश्वास को मजबूत करता है। कि यह संदेश दे रहा था कि जुलूस निकले तो अनुशासन के साथ, धार्मिक खुशी हो तो शालीनता के साथ और अपनी आस्था का इजहार हो तो दूसरों की सुविधा एवं सम्मान का ख्याल रखते हुए। हसवा कस्बे के ग्राम प्रधान राशिद राइन ने बताया कि आज के दौर में जब धार्मिक आयोजनों को लेकर कभी-कभी अनावश्यक शोर, यातायात में अव्यवस्था और विवाद जैसी स्थितियां सामने आती हैं।ऐसे में हसवा कस्बे में देखने को मिला यह अनुशासित स्वरूप निश्चित तौर पर अनुकरणीय कहा जा सकता है। खास तौर पर बच्चों द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह अनुशासन बड़ों के लिए भी एक सीख है कि आने वाली पीढ़ी को केवल धार्मिक परंपराएं ही नहीं, बल्कि उनके साथ अमन, तहजीब, कानून का सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी भी सिखाई जानी चाहिए। जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी का वास्तविक संदेश भी यही है कि इंसान अपने आचरण से दूसरों के लिए आसानी,त मोहब्बत और रहमत का कारण बने। यदि किसी धार्मिक आयोजन से समाज में अमन बढ़े, दिलों में मोहब्बत पैदा हो और लोगों को बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा मिले, तो वही आयोजन अपनी असल खूबसूरती को सामने लाता है। थारियावं एस ओ शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि थाना क्षेत्र में 15 ग्राम पंचायतों में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी जुलूस सादगी रूप निकाला गया है। इन सभी गाँव में भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया था।इस मौके थारियावं सीओ, एवं फ़एस ओ शमशेर बहादुर सिंह एवं हसवा चौकी इंचार्ज अमरीश कुमार मिश्रा भारी सुरक्षा के साथ मौजूद रहे।
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