उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले में प्रारम्भिक बाल्यावस्था विकास, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा पोषण सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए व्यवहार परिवर्तन आधारित एक अभिनव पहल की शुरुआत फतेहपुर में की गई है। जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स के निर्देशन एवं नेतृत्व में संचालित इस पहल का उद्देश्य उपलब्ध आंकड़ों और जमीनी अनुभवों के आधार पर व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाओं की प्रभाव शीलता बढ़ाना तथा समुदाय स्तर पर त्वरित और मापनीय परिणाम प्राप्त करना है। इसी उद्देश्य के साथ बाल विकास परियोजना अधिकारी भिटौरा माधुरी कुमारी द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया , जिसमें महिला पर्यवेक्षको , ए ०एन ० एम ०, आँगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं आशाओं को तकनिकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया जिसमें 25 प्रतिभागियों ने प्रारंभिक अनुसन्धान विषय पर प्रशिक्षण प्राप्त किया। यह पहल 21 जुलाई से 15 दिसम्बर 2026 तक राज्य स्तरीय टीमों के सहयोग से संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत आकांक्षी जनपद फतेहपुर के भिटौरा विकासखंड में चयनित 10 आंगनबाड़ी केन्द्रों, 7 उप-स्वास्थ्य केन्द्रों तथा 5 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को हस्तक्षेप के लिए चिन्हित किया गया है। इन केन्द्रों पर स्वास्थ्य, पोषण और प्रारम्भिक बाल्यावस्था विकास से जुड़े व्यवहारों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विभिन्न व्यवहार परिवर्तन हस्तक्षेप किए जाएंगे। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को समुदाय आधारित व्यवहार परिवर्तन, सेवा प्रदाताओं के बीच समन्वय, सेवाओं की प्रभाव शीलता तथा स्थानीय स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेपों के सम्बन्ध में ऐप बेस्ड तकनीक से आँकड़ों को एकत्र करने की जानकारी दी गई । साथ ही मुख्य विकास अधिकारी पवन कुमार मीना के निर्देशानुसार चयनित सक्षम आँगनबाड़ी केंद्रों में प्रदान किये गए टेलीविजन के माध्यम से विभागीय योजनाओं के प्रचार प्रसार ,समुदाय की जागरूकता बढ़ाने के लिए एवं बच्चों को शिक्षापूर्ण दृश्य एवं श्रव्य सामग्री दिखाने के लिए पेन ड्राइव का वितरण भी किया गया। बैठक के दौरान चयनित स्वास्थ्य एवं पोषण इकाइयों में मौजूद प्रमुख समस्याओं की पहचान, उपलब्ध आंकड़ों एवं अब तक की प्रगति की समीक्षा तथा अपेक्षित परिणामों को अधिक स्पष्ट और मापनीय बनाने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय एवं अभिसरण को मजबूत करने और समुदाय आधारित गतिविधियों को गति देने पर विशेष जोर दिया गया। प्रस्तावित कार्ययोजना के तहत चयनित आंगनबाड़ी केन्द्रों और उप स्वास्थ्य केन्द्रों के माध्यम से समुदाय के साथ सीधे जुड़कर व्यवहार परिवर्तन संबंधी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इन गतिविधियों में स्थानीय स्तर पर पहचाने गए व्यवहारगत अवरोधों को समझना, सेवा प्रदाताओं की भूमिका को स्पष्ट करना तथा परिवारों और समुदाय की भागीदारी को मजबूत करना प्रमुख रूप से शामिल है।
कार्यक्रम से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, केवल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं है; सेवाओं का समय पर उपयोग, सही जानकारी, परिवारों का व्यवहार और समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा पोषण के परिणामों को प्रभावित करते हैं। इसी दृष्टिकोण के साथ इस पहल में आंकड़ों को स्थानीय परिस्थितियों से जोड़कर छोटे स्तर पर व्यवहार परिवर्तन के प्रयोग किए जाएंगे और उनके परिणामों का आकलन किया जाएगा। यह पहल प्रारम्भिक बाल्यावस्था विकास के क्षेत्र में ‘डेटा से समस्या की पहचान, समस्या से समाधान और समाधान से मापनीय परिणाम’ की दिशा में कार्य करने का प्रयास है। प्रारम्भिक बाल्यावस्था में गुणवत्तापूर्ण देखभाल, पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और शुरुआती सीखने के अवसरों को मजबूत करना दीर्घकालिक बाल विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सीख साझा करने की तैयारी। इस पहल के अंतर्गत फतेहपुर में किए जा रहे व्यवहार परिवर्तन संबंधी प्रयोगों और उनसे प्राप्त परिणामों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा। सफल एवं प्रमाण-आधारित स्थानीय प्रथाओं को आगे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साझा किए जाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इस पहल की विशेषता यह है कि इसमें स्वास्थ्य विभाग , बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के जमीनी स्तर के फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को एक साझा कार्यप्रणाली के तहत जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसका लक्ष्य समुदाय के स्तर पर व्यवहार में सकारात्मक बदलाव के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और प्रारम्भिक बाल्यावस्था विकास से जुड़े परिणामों को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस सीख विकसित करना है।
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