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सरकार जहाँ एक ओर आम जनमानस के स्वास्थ को लेकर गम्भीर है और बराबर बेहतर सुविधा देने के प्रयास में है तो वही ज़िम्मेदार अपनी ज़िम्मेदारी से मुँह मोड़े हुए है। जिनका नतीजा है कि जिले के ट्रामा सेन्टरे के अंदर से प्राइवेट पैथोलॉजी के लड़के मरीज़ों के ब्लड का सेम्पल खुले आम लेते हुए नज़र आ रहें है। जैसे वह अस्पताल के कर्मचारी हों आखिर यह सब किसके संरक्षण मे फलफूल रहा है और कौन है इसका जिम्मेदार??

उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले की सदर कोतवाली क्षेत्र में स्थित जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती हुए मरीज़ों व उनके तिमारदारों का खुले आम शोषण किया जा रहा है। जहां मलवा थानां क्षेत्र के दवतपुर गांव निवासी की 10 वर्षीय पुत्री अनीता को पेटदर व बुखार की शिकायत होने पर उसके परिजन इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे तो बच्ची को जांच कराने को कहा गया। और उसकी जाँच अस्पताल की पैथोलाजी से न करवा कर बाहर की फतेहपुर पैथोलॉजी के लड़के सैफ को बुलाकर ट्रामा सेंटर में ही उसका ब्लड सैम्पल निकाला गया।

जब कि सरकार का शख्त आदेश है कि सरकारी अस्पताल में आये हुए मरीज़ों को ना बाहर की दवा लिखी जाए और न ही किसी तरह की कोई जाँच बाहर से कराई जाए। उसके बाद भी सरकार के आदेशों की खुले आम अवहेलना की जा रही है। आखिर यह सब किसके संरक्षण में चल रहा है। जब इस सम्बंध में जब जिला अस्पताल के सीएमएस से मीडिया ने बात करनी चाहीं तो कोई सही जवाब न देते हुए अपने चेम्बर से उठकर चले गए।

इससे साफ जाहिर होता है। कहीं न कही मामला इनके संज्ञान में है। तभी तो मीडिया इनके चेंबर में इनसे मिलकर बात करने पहुँची और यह खुद चेम्बर से बाहर निकल गए। मीडिया के सवालों का कोई जवाब भी नही दिया। इसी का नतीजा हैं कि जिला अस्पताल में दलाल व बाहरी पैथोलॉजी वाले खूब फलफूल रहे है। इनको किसी का कोई डर नही है।
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