हमारे देश में डाक्टर को भगवान् का दूसरा रूप कहा जाता हैँ। डाक्टर का काम है मरीज़ की जान बचाना न कि मरीज़ और उसके तीमारदारों के साथ मार पीट करना। ताज़ा मामला जिले की सदर कोतवाली क्षेत्र के सिविल लाइन मोहल्ले में स्थित एक नर्सिंग होम का है। जहाँ ऑपरेशन के बाद मरीज़ की हालत बिगड़ने पर उसे रेफर किया गया। जिससे मरीज़ की रास्ते मे मौत होने पर मरीज़ के परिजनों के गलत इलाज का आरोप लगाते हुए आला अधिकारियों को शिकायती पत्र देते हुए नर्सिंग होम के डॉक्टर के विरुद्ध कार्यवाई की माँग की है।

बाँदा जनपद के बबेरू थाना क्षेत्र के मंझीवा गाँव निवासी गजराज विश्वकर्मा ने जिला अधिकारी को एक शिकायती प्रार्थना पत्र देते हुए मीडिया को बताया की उसके 23 वर्षीय पुत्र अशोक कुमार को पेट में दर्द की शिकायत होने पर फतेहपुर सदर कोतवाली क्षेत्र के सिविल लाइन पत्थरकटा मोहल्ले में स्थित करूणा जीवन ज्योति नर्सिंग होम मे भर्ती कराया था। पेट मे अत्यधिक दर्द के कारण अस्पताल के डॉक्टर अमित मिश्रा की निगरानी मे भर्ती कर दिया गया। नर्सिंग होम में भर्ती होते ही उससे 15 हजार रूपये नगद जमा कराया।

डॉक्टर अमित मिश्रा के लगभग 24 घण्टे तक इलाज करने के बाद भी की कोई सुधार न होने पर अगले दिन ऑपरेशन किया गया और एक लाख रुपए जमा कराए गए 7 अगस्त की शाम को ऑपरेशन हो गया और देर रात उसकी तबियत ज़्यादा बिगड़ गई। तो डॉक्टर से सम्पर्क किया तो डॉक्टर अमित मिश्रा ने मरीज को गाली गलौज व अपशब्दों का प्रयोग करते हुए 2-3 झापड़ मारे और अस्पताल से बाहर निकाल फेकने की धमकी दिया। जिसका वीडियो उसके पास मौजूद है, 8 अगस्त की सुबह कानपुर रेफर कर 12 हज़ार रुपये वापस किया बाकी एक लाख रुपए बाद में देने का वादा किया।


कानपुर ले जाते समय रास्ते उसके पुत्र की मौत हो गई। वही मृतक के पिता गजराज विश्वकर्मा ने अपने मृतक पुत्र को न्याय दिलाने के लिए कई जगह शिकायत किया। कोई सुनवाई न होने पर जिला अधिकारी की चौखट पर पहुंचकर न्याय की गुहार लगाते हुए नर्सिंग होम संचालक अमित मिश्रा और उसके मानक विहीन नर्सिंग होम की जाँच कर कठोर कार्यवाई किये जाने की माँग की है।
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