उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले के अमौली विकासखंड क्षेत्र के नरैचा गांव में परती भूमि विकास विभाग के जलागम विकास घटक द्वारा वाटरशेड महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पहुंचे अधिकारियों एवं कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों और आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं कोत जल संरक्षण, भूमि संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के महत्व की जानकारी देकर जागरूक किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। महिलाओं ने कलश यात्रा निकालकर गांव में जल एवं भूमि संरक्षण के प्रति जनजागरण किया। मुख्य अतिथि भूमि संरक्षण अधिकारी अख्तर हुसैन ने कहा कि वाटरशेड महोत्सव का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण एवं वर्षा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. शिवमंगल सिंह ने किसानों को फसल कटाई के बाद खेतों की मेड़ खुली न छोड़ने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि पहली बारिश से भूमि को प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन प्राप्त होती है, लेकिन मेड़ खुली रहने से उसका लाभ नहीं मिल पाता। भूमि परीक्षण प्रयोगशाला प्रभारी प्रेमदान पाल ने मिट्टी की जांच के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को नियमित परीक्षण कराने के लिए प्रेरित किया। साथ ही नाडेप कम्पोस्ट एवं वर्मी कम्पोस्ट बनाने की विधि भी बताई गई। कृषि विभाग के सलाहकार कुंवर सेन गंगवार ने सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन आलोक गौड़ ने किया। इस अवसर पर कंपोजिट विद्यालय में जल संरक्षण विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें आकांक्षा, शिवानी और रिया क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहीं। विजेताओं को प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। तालाब बनाकर जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे 10 किसानों को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम के अंतर्गत पौधारोपण एवं स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। इस मौके पर अवर अभियंता पीयूष कुमार सहित विभिन्न गांवों के किसान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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