उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले के खागा खागा स्थित अपने आवास पर सपा नेता अंकित यादव ने फतेहपुर सांसद नरेश उत्तम पटेल द्वारा सदन में शिक्षामित्रों के मानदेय को बढ़ाने की मांग को लेकर उठाई गई आवाज को साझा करते हुए प्रेसवार्ता करते हुए बताया कि सांसद नरेश उत्तम पटेल ने सदन के पटल पर शिक्षामित्रों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए सासंद ने कहा कि शिक्षामित्रों को 40 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय देने की बात कही गई है। सासंद द्वारा उठाए गए इस मुद्दे को लेकर शिक्षामित्र संघ ने आभार प्रकट किया है।सासंद में बोलते हुए नरेश उत्तम पटेल ने सदन को अवगत कराया कि 1999 में शिक्षामित्र बनाए गए थे। जिन्हें तीन हजार से पैंतीस सौ रुपए मिलते थे। एक शिक्षामित्र का हवाला देकर सांसद ने सदन को अवगत कराया कि उन्हें शिक्षामित्र ने बताया कि पहले उन्हें 3900 रुपए मिलता था। लेकिन अब उन्हें किसी तरह से दस हजार रुपए में परिवार का भरण-पोषण करना पड़ रहा है। जो बेहद दिक्कत परेशानी गौर तलब है। समाज वादी पार्टी की सरकार बनने के बाद शिक्षामित्रों के संघर्ष और सेवा को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें शिक्षक का दर्जा दिया और सीधे 35 से 40 हजार रुपए की व्यवस्था किए गए। लेकिन बाद में सरकार ने द्वेष भावना के अंतर्गत उनका मानदेय दस हजार कर दिया।इस समय शिक्षा मित्रों की हालत बेहद चिंताजनक है।एसआईआर के काम में लगे कई शिक्षामित्र मृत्यु का शिकार हो चुके हैं।सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद उनका मानदेय 18000 किया गया।वे सदन से मांग करते हैं कि शिक्षा मित्रों को कम से कम 40 हजार रुपए प्रति माह दिए जाएं क्योंकि वे शिक्षण के साथ-साथ सरकार के अनेक कार्य संपादित करते हैं।शिक्षामित्रों के अधिकारों को लेकर सांसद नरेश उत्तम पटेल जब संसद में बोल रहे थे । तो विपक्ष की ओर से मेज थपथपा कर उनका समर्थन किया जा रहा था।
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