उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले की बिंदकी कोतवाली पुलिस द्वारा धोखाधड़ी एवं संगठित अपराध में संलिप्त एक अंतरराज्यीय गिरोह के 03 शातिर आरोपियो को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से गायब किए गए चावल की बिक्री से प्राप्त ₹80,500/- नगद, 09 आधार कार्ड, 06 पैन कार्ड, 02 आरसी, एक वाहन परमिट, 03 एटीएम कार्ड, 06 मोबाइल फोन, 03 सिम कार्ड, 04 चेकबुक, 01 फास्ट टैग, 02 पासबुक, 01 बिल्टी, 08 पॉकेट डायरी तथा घटना में प्रयुक्त ट्रक बरामद किया गया है। थाना बिंदकी पर वादी निर्मल शंकर गुप्ता पार्टनर, फर्म मेसर्स उमाशंकर मिल्स, ललौली रोड, बिदकी द्वारा दी गई तहरीर में बताया गया कि दिनांक 23.03.2025 को उनके गोदाम से ट्रक संख्या JH12L8838 पर 300 कुंतल 65 किलोग्राम खंडा चावल (कीमत लगभग ₹8,14,762/-) लोड कराया गया था, जिसे चालक द्वारा वैध दस्तावेज (आईडी, आरसी, डीएल, पैन कार्ड) प्रस्तुत कर पटना, बिहार भेजा जाना था। किन्तु निर्धारित समय तक माल गंतव्य स्थान पर नहीं पहुंचा। तथा चालक का मोबाइल फोन भी बंद हो गया। इस संबंध में थाना बिंदकी पर मु0अ0सं0 130/2025 धारा 316(2)/318 (4) बीएनएस के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन एवं अपर पुलिस अधीक्षक के पर्यवेक्षण में, पुलिस उपाधीक्षक बिंदकी के नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान में विवेचना एवं साक्ष्य संकलन के आधार पर दिनांक 15.04.2026 को मुखबिर की सूचना पर आरोपी बिहार प्रांत के औरंगाबाद जिले के ओबरा थानां क्षेत्र के कनोखर गाँव निवासी चरित्र सिंह के पुत्र राजेंद्र कुमार व पटना जिले के राजीवनगर थानां क्षेत्र के 23 टावर गली मोहल्ला निवासी जोधन प्रसाद के पुत्र इंद्रदेव कुमार उर्फ गणेश कुमार और पटना जिले के मसौढ़ी थाना क्षेत्र के सती स्थान निवासी दिनेश प्रसाद के पुत्र रामानुज कुमार को गिरफ्तारी एवं बरामदगी के आधार पर अभियोग में धारा 338/336 (1)/340(2)/317 (2) बीएनएस की वृद्धि की गई है। सभी आरोपियो को आज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।पूछताछ के दौरान आरोपियो द्वारा बताया गया कि उनका गिरोह संगठित रूप से कार्य करता है, जिसका संचालन ओमेंद्र द्वारा किया जाता है। गिरोह के सदस्य फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर ट्रांसपोर्टरों से संपर्क करते थे। गिरोह द्वारा ट्रक पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर माल लोड कराया जाता था। तथा निर्धारित स्थान पर न पहुंचाकर उसे कम कीमत पर बेच दिया जाता था। इस प्रकार प्राप्त धनराशि को आपस में बांट लिया जाता था। उक्त प्रकरण में भी इसी प्रकार की कार्यप्रणाली अपनाई गई।, 1. आर्थिक संकट में फंसे ट्रकों की पहचान करना।, 2. बीमा क्लेम प्राप्त करने हेतु झूठी चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराना।, 3. फर्जी नंबर प्लेट लगाकर विभिन्न प्रकार के माल की ढुलाई करना।, 4. माल को गंतव्य तक न पहुंचाकर कम कीमत पर बेच देना।, 5. पहचान छुपाने हेतु वाहन के नंबर/चेसिस में परिवर्तन करना।, 6. फर्जी आधार एवं पैन कार्ड का उपयोग करना।, 7. गिरोह का वित्तीय प्रबंधन एवं समन्वय मुख्य सरगना द्वारा किया जाना।
नोट:- पूरे महीने का विज्ञापन बुक कराए कम कीमत में सम्पर्क करें। 9044684414

By

Share
Share