उत्तर प्रदेश कौशांबी जिले में संतुलित उर्वरक उपयोग विशेष अभियान के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र, कौशांबी द्वारा निकरा परसरा में शुक्रवार को कृषक जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषकों को हरी खाद हेतु ढैंचा फसल के महत्व, लाभ, वैज्ञानिक बुवाई विधि एवं मृदा स्वास्थ्य सुधार में इसकी भूमिका के बारे में विस्तृत तकनीकी जानकारी प्रदान की गई। साथ ही कृषकों को ढैंचा बीज का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डा. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि ढैंचा हरी खाद के रूप में भूमि में जैविक कार्बन एवं नत्रजन की मात्रा बढ़ाने में अत्यंत उपयोगी है। इससे मिट्टी की संरचना, जलधारण क्षमता एवं सूक्ष्मजीव गतिविधियां बेहतर होती हैं, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होने के साथ फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने किसानों को ढैंचा की समय पर बुवाई, खेत तैयारी एवं पलटाई की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी भी दी। इस अवसर पर डा. अमित केशरी ने संतुलित उर्वरक उपयोग एवं मृदा परीक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कृषकों को उर्वरकों के संतुलित प्रयोग हेतु प्रेरित किया। वहीं निकरा एस.आर.एफ. प्रदीप कुमार ने परियोजना के अंतर्गत संचालित गतिविधियों एवं कृषक लाभकारी योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में उपस्थित कृषकों ने हरी खाद एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन संबंधी तकनीकों में रुचि दिखाते हुए वैज्ञानिकों से विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
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