उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले की सदर नगर पालिका परिषद के सभासद दीपक कुमार मौर्य ने खलीलनगर क्षेत्र में नाला सफाई कार्य में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है। बुधवार को दिए गए शिकायती पत्र में उन्होंने कहा कि ठेकेदार ने काम सिर्फ कागजों पर पूरा दिखाया है, जबकि मौके पर स्थिति बद से बदतर है।सभासद दीपक कुमार मौर्य, वार्ड नं-दो आवास विकास कालोनी के मुताबिक, नगर पालिका परिषद फतेहपुर ने जारी ई-निविदा क्रमांक 05 के तहत “खलीलनगर में आवास विकास रोड से तालाब होते हुए नवइया तालाब तक नाला सफाई एवं सिल्ट निस्तारण” का कार्य कराया जाना था। मौके की फोटो और स्थल निरीक्षण से साफ है कि तालाब/नाला क्षेत्र में अभी भी पानी जमा है। भारी मात्रा में जलकुंभी, घास, कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक, सिल्ट और गंदगी पड़ी हुई है। इससे स्पष्ट है कि सफाई का काम या तो आंशिक हुआ है या सिर्फ कागजों पर दिखाया गया है। बीमारियों का बढ़ा खतरा, लोकधन के दुरुपयोग का आरोप सभासद ने चेताया कि गंदगी और जलभराव के कारण स्थानीय लोगों को दुर्गंध, मच्छरजनित बीमारियों, डेंगू-मलेरिया, जल प्रदूषण जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि अगर बिना सफाई के भुगतान किया गया है तो यह लोकधन के दुरुपयोग की श्रेणी में आएगा।पत्र में सभासद ने डीएम से मांग की है: राजस्व/तकनीकी टीम से मौके पर जांच कराई जाए कि काम वास्तव में पूरा हुआ या नहीं।कार्य से पहले, दौरान और बाद के फोटो/वीडियो, माप पुस्तिका, भुगतान बिल और सिल्ट निस्तारण स्थल के अभिलेख खंगाले जाएं। काम अधूरा/घटिया मिलने पर ठेकेदार का भुगतान रोककर वसूली की जाए और संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय हो नाले-तालाब से कूड़ा, जलकुंभी, सिल्ट की वास्तविक सफाई तुरंत कराई जाए।जांच रिपोर्ट की प्रति उन्हें उपलब्ध कराई जाए।सभासद ने पत्र के साथ स्थल की फोटो और निविदा सूचना की प्रति भी संलग्न की है। स्थानीय लोग भी इस शिकायत के बाद प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि बरसात से पहले होने वाली नाला सफाई आखिर कागजों तक ही सीमित क्यों रह जाती है?
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