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उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले में प्रदेश के लगभग 36 हजार ग्राम रोजगार सेवकों ने राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। मांगों का शीघ्र समाधान न होने पर आगामी 1 जुलाई 2026 को विधान सभा घेराव और लखनऊ में बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है। ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2006 से मनरेगा योजना के अंतर्गत ग्राम रोजगार सेवक ग्राम पंचायतों में संविदा पर कार्यरत हैं। 17 वर्षों से लगातार सेवाएं देने के बावजूद आज तक उन्हें नियमित नहीं किया गया। वर्तमान में उन्हें मात्र 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है, जबकि कई राज्यों में समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को समूह ‘ग’ कर्मचारियों के बराबर वेतन और सुविधाएं दी जा रही हैं। रोजगार सेवकों ने आरोप लगाया कि मनरेगा के प्रशासनिक मद से मानदेय भुगतान होने के कारण समय से वेतन नहीं मिल पाता। प्रदेश में कई रोजगार सेवकों का 12 से 14 माह तक मानदेय बकाया है, जिससे आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। ज्ञापन में मांग की गई कि ग्राम पंचायतों में सहायक सचिव या ग्राम विकास सहायक का पद सृजित कर ग्राम रोजगार सेवकों को समायोजित किया जाए। साथ ही मुख्यमंत्री की 4 अक्टूबर 2021 की घोषणा के अनुरूप मानव संसाधन नीति लागू कर न्यूनतम 24 हजार रुपये मानदेय, चिकित्सा सुविधा, आकस्मिक अवकाश, स्थानांतरण नीति एवं मृतक आश्रित को नौकरी दी जाए। इसके अतिरिक्त मनरेगा कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए एंड्रॉयड मोबाइल और डाटा रिचार्ज उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। रोजगार सेवकों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 1 जुलाई को विधानसभा घेराव के साथ जवाहर भवन, भाजपा कार्यालय, इंदिरा भवन, चारबाग रेलवे स्टेशन और राजभवन गेट पर प्रदर्शन किया जाएगा।
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