उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले के थरियांव थाना पुलिस द्वारा कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी अभिलेख तैयार कर विभिन्न अभियोगों में फर्जी जमानत कराने वाले शातिर/हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक के निर्देशन में जनपद में अपराध, अपराधियों एवं अभियोगों में फर्जी और पेशेवर जमानतदारों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान में अपर पुलिस अधीक्षक के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी थरियांव के नेतृत्व में दिनांक- 28.07.2026 को थाना थरियांव पुलिस द्वारा क्षेत्र में गश्त व संदिग्धों/अभियुक्तों के सत्यापन हेतु चलाए जा रहे अभियान के दौरान मुखबिर खास एवं आम जनमानस से सूचना प्राप्त हुई कि थाना थरियांव का मजारिया/हिस्ट्रीशीटर आरोपी सतीश चन्द्र उर्फ सतीश लोधी पुत्र जगतपाल निवासी ग्राम हसवा कचहरी में मुंशीगिरी का कार्य करता है तथा अवैध आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से अपराधियों से मिली भगत कर एक ही अचल संपत्ति व आधार कार्ड का बार-बार प्रयोग करके फर्जी व कूटरचित दस्तावेज तैयार करता है। उसके द्वारा इन्हीं कूटरचित प्रपत्रों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर कई गंभीर अपराधों के अभियुक्त की फर्जी जमानत कराई जाती है, जिससे कई अभियुक्त जमानत मिलने के बाद फरार हो जाते हैं और न्यायिक प्रक्रिया बाधित होती है। मुखबिर की सटीक सूचना पर ग्राम हसवा में दबिश देकर सतीश चन्द्र उर्फ सतीश लोधी को हिरासत में लिया गया एवं जमानत अभिलेखों के सत्यापन के दौरान जनपद के विभिन्न थानों से संबंधित लगभग 08 मुकदमों में एक ही खतौनी व कूटरचित अभिलेखों का प्रयोग कर फर्जी जमानत कराया जाना सही पाया गया, अभियुक्त की जामा तलाशी लेने पर उसके पास से विभिन्न अभियोगों से संबंधित फर्जी जमानत प्रपत्रों की छायाप्रतियां तथा एक ही खतौनी व आधार कार्ड की प्रतियों के विभिन्न मुकदमों में उपयोग किए जाने संबंधी कूटरचित अभिलेख बरामद हुए जिसके आधार पर थाना थरियांव पर मु0अ0सं0 189/2026 धारा 316/318(2)/227/323/338 बीएनएस पंजीकृत किया गया। गिरफ्तार अभियुक्त को आवश्यक विधिक कार्यवाई करते हुए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। पूछताछ के दौरान सतीश चन्द्र उर्फ सतीश लोधी ने बताया कि वह कचहरी में मुंशीगिरी का कार्य करता है। आर्थिक लाभ अर्जित करने के उद्देश्य से वह विभिन्न आपराधिक मामलों में अभियुक्तों की जमानत कराने हेतु एक ही अचल संपत्ति (खतौनी) एवं आधार कार्ड की प्रतियों का बार-बार उपयोग करता था। अभियुक्त ने स्वीकार किया कि उसने विभिन्न अभियोगों में एक ही खतौनी क्रमांक 156827, खाता संख्या 00341 एवं अन्य कूटरचित अभिलेखों का प्रयोग कर लगभग 07-08 अभियुक्तों की जमानत कराई। उसने यह भी स्वीकार किया कि जमानत प्रपत्रों में प्रयुक्त दस्तावेज वास्तविक तथ्यों के अनुरूप नहीं थे तथा उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत कर जमानत प्राप्त कराई गई। अभियुक्त द्वारा अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया गया कि उसने यह कार्य आर्थिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से किया।
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