उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले में गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान का प्रतीक गुरुपूर्णिमा का पर्व आज शारंगधर कला गन्धर्व वेद विद्यापीठ, फतेहपुर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पूरा परिसर भजनों, संगीत और श्रद्धा के रंग में सराबोर रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर वृंदावन धाम से पधारे संत राधिका दास, कैलाशी अनिल द्विवेदी, विवेक मिश्रा और सुधा त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। संस्थान के संचालक महेन्द्र कुमार अवस्थी ने कार्यक्रम की शुरुआत अपनी संगीत गुरु, गुरु-मां नादलीन स्व. श्रीमती शंकरी गुहा एवं पण्डित विष्णु दिगम्बर पलुस्कर की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पूजन के साथ की। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां। गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में संस्थान के विद्यार्थियों ने मनोहारी भजन प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। कोपल गुप्ता, सौम्या तिवारी, काव्या पाल, मानसी, काव्या मिश्रा, अमन, पार्थ, अधिराज, आराध्या, श्रीनिका, आराध्या शुक्ला, अरुणिमा, प्रत्यूष, अन्वेषा, दिव्या और संस्थान की सहसंचालिका दीक्षा पाल की प्रस्तुतियों को खूब सराहा गया। कार्यक्रम में अभिनव सिंह के बांसुरी वादन ने माहौल को और रसमय बना दिया। बांसुरी की तान सुनकर उपस्थित श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। इस अवसर पर सारिका, संगीता, हिमांशु तिवारी सहित सभी विद्यार्थियों के अभिभावकगण भी मौजूद रहे।।गुरु तत्व और संगीत पर विशेष चर्चा।समापन अवसर पर संस्थान के संचालक महेन्द्र कुमार अवस्थी ने कहा कि गुरु तत्व सर्वव्यापक है और परम ज्ञान का स्रोत है। उन्होंने कहा, संगीत ईश्वर की रसमय अभिव्यक्ति है। ब्रह्म तत्व से एकात्मता स्थापित करने के लिए यह सबसे सहज और उत्तम साधन है और भारत का संगीत इस मार्ग का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है। पूरे कार्यक्रम में अनुशासन श्रद्धा और सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला। अंत में सभी अतिथियों और अभिभावकों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना की और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी।
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