उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले के बिन्दकी तहसील क्षेत्र में आजीविका मिशन से जुड़कर नीरजा देवी ने न केवल अपनी आर्थिक रूप से बदहाल जिन्दगी को संवारा है। बल्कि माही महिला स्वयम् सहायता समूह की सदस्यों को भी आत्मनिर्भर बनाने का भागीरथ काम कर रही है। साथ ही उन महिलाओं को भी प्रेरणास्रोत बन कर दिशा दे रही हैं जो अपनी मुफलिसी की जीवन संवारना चाहती हैं। बिन्दकी तहसील के जाफराबाद गांव के मजरा चक मोहद्दीनपुर निवासी नीरजा देवी ने आजीविका मिशन से जुड़ कर आर्थिक रूप से बदहाल अपनी जिन्दगी के आत्मनिर्भर बनने तक की संघर्षपूर्ण कहानी को सुनाते हुए बताया कि मेरी शादी एक गरीब परिवार में हुई थी। बदहाल जिन्दगी से उबरने की कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही थी। सन् 2021 में ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर माही महिला स्वयम् सहायता समूह बनाया और जिले में आयोजित मेले में अगरबत्ती व धूपबत्ती बनाने का काम सीखा। हिम्मत कर घर में ही अगरबत्ती व धूपबत्ती बनाने का काम शुरू किया। फिर अगरबत्ती को गांव-गांव जाकर बेचना शुरू किया। धन के अभाव में बहुत कम आमदनी हो रही थी। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। दो हजार रुपये से काम शुरू किया और फिर मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और हर चुनौती से लड़ते हुए मन लगा कर अपने काम में लगी रही। इसी दौरान एनआरएलएम के माध्यम से 15 हजार रुपये से लोन लेकर अपने काम को बढ़ाया, जिससे आमदनी में बढ़नी शुरू हुई। आज हमें हर महीने करीब दस हजार रुपये की आमदनी हो जाती है, जिससे परिवार की जरूरी आवश्यकताएं पूरी हो जाती है। वहीं समूह से जुड़ी अन्य सदस्य माया, सोनी, रेखा सुनीता, राजकुमारी व लक्ष्मी को भी करीब तीन व चार हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है।
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