उत्तर प्रदेश फतेहपुर जनपदीय साइबर सेल द्वारा म्यूल बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने एवं साइबर ठगी की धनराशि का हस्तांतरण करने वाले गिरोह के दो आरोपी गिरफ्तार किए गए। विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी से संबंधित कुल 09 शिकायतें प्रकाश में आई, जिनमें कुल 04 करोड़ 77 लाख 37 हजार 216 रुपये की धनराशि शामिल। गिरफ्तार आरोपियो के कब्जे से 03 मोबाइल फोन, 01 चेकबुक, 03 एटीएम कार्ड एवं 02 पासबुक बरामद। समन्वय पोर्टल पर प्राप्त साइबर फ्राड की शिकायतों से सम्बन्धित म्यूल खातों की जाँच में जनपदीय साइबर सेल द्वारा दिनाँक 17.10.2026 को संदिग्ध मोबाइल नम्बरों, बैंक खातों व संदिग्ध व्यक्तियों के द्वारा जाँच/सत्यापन के अनुक्रम में संकलित अभिलेखीय/इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के आधार पर पूछताछ में विभिन्न बैंकों में म्यूल बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने एवं खातों के माध्यम से साइबर ठगी की धनराशि का हस्तांतरण कारित करने वाले गिरोह का भण्डाफोड़ कर साइबर क्राइम पुलिस थाना पर पंजीकृत अभियोग मु0अ0सं0 28/2026 धारा 317(4), 49 बीएनएस व 66C IT ACT पंजीकृत किया गया। पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक के निर्देशन में साइबर अपराध व अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाये जाने हेतु प्रभावी नियंत्रण बनाये रखने हेतु चलाये जा रहे अभियान में एवं अपर पुलिस अधीक्षक के पर्यवेक्षण में क्षेत्राधिकारी नगर/साइबर के कुशल नेतृत्व में जनपदीय साइबर सेल द्वारा बैंकों में म्यूल बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने एवं खातों के माध्यम से साइबर ठगी की धनराशि का हस्तांतरण कारित करने वाले गिरोह को दिनाँक 17.10.2026 गिरोह के थानां क्षेत्र परसदेपुर गाँव निवासी रघुवीर का 26 वर्षीय पुत्र अनुज पटेल उर्फ बलजीत व मलवा थानां क्षेत्र के उमरापुर गाँव निवासी श्रीलाल का 22 वर्षीय पुत्र लवकुश को गिरफ्तार कर घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन बरामद किया गया। गिरफ्तारी एवं माल बरामदगी के आधार पर पंजीकृत अभियोग मु0अ0सं0 28/2026 धारा 317(4), 49 बीएनएस व 66C IT ACT पंजीकृत कर विधिक अनुक्रम में अभियुक्तों को आज दिनांक 18.10.2026 को मा0 न्यायालय रवाना किया गया।पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियो द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा साइबर अपराध में फ्राड किये गए रुपयों को चैनल/हस्तांतरित करने के लिए अपने खातों को किराए पर दिया जाता था। इसके लिए उन्हें इस फ्राड धनराशि का अंश प्राप्त होता था और अन्य लोगों के खातों से लिंक मोबाइल नंबर/सिम को अपने मोबाइल में लगाकर यूपीआई आईडी बनाकर साइबर फ्राड से आई हुई धनराशि को आगे अन्य म्यूल खातों में हस्तांतरित कर दिया जाता था।
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