उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले के ऐरायां ब्लॉक के इजूरा बुजुर्ग गांव में पूर्व प्रधान इनायत हुसैन उर्फ अशोक प्रधान के संयोजन में जमाले हबीब कॉन्फ्रेंस में हजरत अल्लामा मुफ्ती मौलाना मोइनुद्दीन कादरी चतुर्वेदी शेखुल हदीस जामिया मालदा बंगाल ने कुरआन के साथ-साथ भगवत गीता के श्लोकों के माध्यम से भाईचारा एवं इंसानियत का पैगाम दिया। चार भाषाओं में तकरीर सुनकर लोग हैरत में पड़ गए।इसके पहले उनके आगमन पर कार्यक्रम के आयोजक इनायत हुसैन उर्फ अशोक प्रधान के नेतृत्व में गुलपोशी कर इस्तकबाल किया गया।माता-पिता की सेवा पर उन्होंने विशेष जोर दिया। कॉन्फ्रेंस में नातिया कलाम भी पेश किए गए। मौलाना मोइनुद्दीन चतुर्वेदी ने कहा कि नात सुनना भी अल्लाह की इबादत है। ऐसा लगता है बदरे मुनीर आएंगे, आज महफिल में पीराने-पीर रहेंगे। उन्होंने आज के हालात के एतबार से भी गुफ्तगू की और इंसानियत को सबसे बड़ा दर्जा दिया। उन्होंने कहा कि इस्लाम गरीब नवाज, गौसे आजम,नरसूल अल्लाह की जीवनी है जिसमें इंसानियत का ही पाठ पढ़ाया गया है। इंसान उसे कहते हैं जिसके पास इंसानियत है, हाथ पैर तो जानवरों के भी होते हैं।पड़ोसी को तकलीफ हो और हमारा दिल बेचैन हो जाए तो समझो हम इंसान हैं। आयोजक अशोक प्रधान का जिक्र करते हुए मौलाना ने फरमाया कि महबूब की महफिल तो महबूब सजाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर दौलत मिली है तो एक बार हुजूर का गुंबदे खजरा जरूर देख लेना। श्री चतुर्वेदी ने माता-पिता की खिदमत के हवाले से फरमाया कि माता-पिता को कभी भी तकलीफ मत देना। एक बार पूजा, पाठ, इबादत भूल जाना लेकिन माता-पिता की खिदमत करना मत भूलना। भाईचारे पर बल देते हुए कहा जोहर कानपुरी के चार मिसरे पढ़े-हवेली, झोपड़ी सबका मुकद्दर टूट जाएगा, अगर ये साथ हिंदू मुस्लिमों का छूट जाएगा, दुआ कीजये कि हममें प्यार के रिश्ते रहे कायम, ये रिश्ता टूट जाएगा तो भारत टूट जाएगा। पूर्व प्रधान इनायत हुसैन उर्फ अशोक प्रधान ने बेटी की शादी के मौके पर जमाले हबीबी कॉन्फ्रेंस आयोजित की जिसमें तकरीर के साथ-साथ जाने-माने शायरों ने नातिया कलाम पेश किए। प्रोग्राम के सरपरस्त मौलाना मोहम्मद आजम रजा ने तकरीर के दौरान पढ़ा-मुकद्दर जगमगाना चाहता हूं, मदीना मैं भी जाना चाहता हूं। शादी करो अली की तरह बच्चे पैदा होंगे वली की तरह।निजामत अब्दुल कादिर हबीबी ने की। वादी रजा का कोहे-हिमाला रज़ा का है, जिस सिम्त देखिए वो इलाका रजा का है। भदोही के शोएब रजा वारसी ने पढ़ा-दुनिया के साथ दौलते-उकबा लिए हुए, लौटा दरे-रसूल से क्या-क्या लिए हुए, महशर का सामना मैं करूंगा खुदा कसम, अपने नबी का सिर्फ भरोसा लिए हुए। समीर रजा इलाहाबादी ने पढ़ा-बड़े लतीफ हैं नाजुक से घर में रहते हैं, मेरे हुजूर मेरी चश्मे-तर में रहते हैं, यकीन वाले कहां से कहां तलक पहुंचे, जो अहले-शक हैं, अगर में मगर में रहते हैं। मौलाना अनवार आलम उर्फ जम जम फतेहपुरी ने नातिया कलाम से महफिल लूट ली। बादलों में हिलाल आ गया है, क्या नबी का बिलाल आ गया है, रो रहे हैं शबो-रोज आका, उम्मती का खयाल आ गया है। अख्तर रजा बरकाती, कारी इकरार अहमद, कारी जावेद अहमद, अब्दुल कादिर हबीबी, आफताब आलम अल्लीपुरी ने नातिया कलाम पढ़े। इंतजाम कारों में मोहम्मद हुसैन नान बच्चा, अफसर प्रधान, मोहम्मद परवेज, शकील अहमद, तबरेज आलम आदि अनेक लोग रहे।मौलाना चतुर्वेदी की तकरीर सुनने के लिए जश्ने-मुस्तफा में अकीदतमंदों की भारी भीड़ रही जिसमें महिलाएं भी बड़ी संख्या में थीं।
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