उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले में राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत 31 मई, 2026 विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के उपलक्ष्य में आज दिनॉक: 29.05.2026 को गोष्ठी का आयोजन अमर शहीद जोधा सिंह अट्ट्या ठाकुर दरियाव सिंह मेडिकल कॉलेज में किया गया। इसमें बताया गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 1987 में तम्बाकू निषेध दिवस मनाने का फैसला लिया गया था। इसका मुख्य कारण था कि उस दौर में तम्बाकू का सेवन से होने वाली मौतों की संख्याओं की बढ़ोत्तरी होना। अगले वर्ष 1988 से विश्व तम्बाकू निषेध दिवस 31 मई को मनाया जाने लगा। इसमें इस वर्ष की थीम ‘आकर्षण का पर्दाफाश-निकोटीन और तम्बाकू की लत का मुकाबला है। कार्यक्रम का शुभारम्भ डॉ० राजेश कुमार मौर्या प्रधानाचार्य/डीन ने अपने उद्बोधन से किया उन्होनें बताया कि 31 मई विश्व तम्बाकू निषेध दिवस का उद्देश्य तम्बाकू सेवन से होने वाली मृत्यु और बीमारियों के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरूआत की गई थी। उन्होंने ये भी बताया कि युवाओं और बच्चों को तम्बाकू की लत से बचाना साथ ही धूमपान एवं अन्य तम्बाकू उत्पादों के उपयोग को कम करना व सार्वजानिक स्थानों को धूमपान/ तम्बाकू मुक्त बनाना है। इसी बीच डॉ० प्रदीप कुमार शर्मा उप प्रधानाचार्य ने बताया कि भारत में तम्बाकू सेवन कैंसर हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ो की बीमारियों का बड़ा कारण है जिसमें सबसे ज्यादा सेकेन्ड हैन्ड स्मोक (दूसरे के धूएँ) से गम्भीर नुकसान होता है। नोडल अधिकारी डॉ० राजेन्द्र कुमार ने बताया कि तम्बाकू गुटखा सिगरेट की लत मुख्य रूप से इसमें मौजूद निकोटीन के कारण होती है अगर लोग इसको छोड़ना चाहें तो सिर्फ दो से तीन सप्ताह में ये आदत बदली जा सकती है जिसमें प्रमुख रूप से इच्छा शक्ति प्रबल रखनी पड़ती है अगर ये क्रिया शुरू की जाती है तो 72 घंटे के भीतर निकोटीन शरीर के बाहर निकल जाता है। जिला अपर शोध अधिकारी महेन्द्र सिंह लोधी ने बताया कि समाज में फैला ये विष मानसिक आर्थिक और शारिरिक रूप से समाज को एक गहरी खाई की तरफ ढकेल रहा है अगर हम सब आज ये विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के उपलक्ष्य में ये प्रण ले कि हम सब तम्बाकू मुक्त समाज का निर्माण करें। इसी क्रम में उ०प्र० वालेण्ट्री हेल्थ एसोसिएशन के रीजनल कोआर्डिनेटर ने बताया कि तम्बाकू का सेवन जानलेवा हो सकता है। इस 31 मई 2026 में डब्लू एच ओ की थीम ‘आकर्षण का पर्दाफाश-निकोटीन और तम्बाकू की लत का मुकाबला यह दर्शाता है कि युवा वर्ग को तम्बाकू कम्पनियाँ तमाम लुभावने ऐड देकर युवाओं को भ्रमित करती रहती हैं, जिससे युवा वर्ग इस गंदी लत के आदी होते जा रहे हैं। इससे हम सबका लक्ष्य आने वाली युवा पीढ़ी को बचाना है। साथ ही उन्होंने बताया कि धूम्रपान मानसिक स्वास्थ्य के साथ ही शारीरिक सेहत पर भी नकारात्मक असर डाल रहा है। इसे किसी भी रूप में सेवन करने पर जीवन पर खतरा पड़ सकता है। उन्होंने कोटपा अधिनियम की सभी धाराओं पर प्रेजेंटेशन दिया गया। इस कार्यक्रम में 86 मेडिकल छात्र/छात्राओं एवं फैकल्टी मेम्बर्स ने तम्बाकू के प्रयोग न करने की शपथ ली।
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