उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स की अध्यक्षता में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण एवं कृषकों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जनपद स्तरीय अधिकारियों, समस्त उप जिलाधिकारियों एवं कृषक उत्पादक संगठनों (एफ०पी०ओ०) के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि धान की कटाई के दौरान प्रत्येक कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रॉ रीपर, स्ट्रॉ रेक, बेलर अथवा अन्य अनुमन्य फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र का अनिवार्य रूप से प्रयोग कराया जाए। यदि कोई कम्बाइन हार्वेस्टर फसल अवशेष प्रबंधन की निर्धारित व्यवस्था के बिना फसल कटाई करता हुआ पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल सीज की कार्यवाई एवं अर्थदण्ड की कार्यवाई की जाए। किसी भी दशा में फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र के बिना कम्बाइन हार्वेस्टर के संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस संबंध में कम्बाइन हार्वेस्टर संचालकों एवं कृषक उत्पादक संगठनों (एफ०पी०ओ०) की भी स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित की गई है कि वे अपने क्षेत्र के कृषकों को जागरूक करें तथा यह सुनिश्चित करें कि फसल अवशेष जलाने की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि विगत वर्षों में पराली जलाने की अधिक घटनाओं को दृष्टिगत रखते हुए उप कृषि निदेशक को निर्देशित किया गया कि जिन ग्रामों में कृषकों द्वारा पराली जलाए जाने की घटनाएं प्रकाश में आई हैं, ऐसे कृषकों की सूची तैयार कर समस्त उप जिलाधिकारियों को उपलब्ध कराई जाए। समस्त उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि संबंधित राजस्व लेखपालों के माध्यम से ऐसे ग्रामों में बैठक आयोजित कर कृषकों को स्पष्ट रूप से जागरूक किया जाए कि किसी भी दशा में पराली न जलाई जाए। यदि किसी ग्राम में फसल अवशेष जलाने की घटना प्रकाश में आती है, तो संबंधित कृषक के साथ-साथ संबंधित राजस्व लेखपाल के विरुद्ध भी नियमानुसार दण्डात्मक कार्यवाई की जाएगी। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि गौशाला में पराली उपलब्ध कराने के इच्छुक कृषकों की सूची तैयार कर सचिव के माध्यम से संबंधित गौशालाओं में पराली भिजवाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देशित किया कि समस्त ग्राम प्रधानों की बैठक आयोजित कर उन्हें प्रेरित किया जाए कि वे अपनी-अपनी ग्राम पंचायत में फसल अवशेष न जलाने के अभियान का नेतृत्व करें तथा कृषकों को पराली न जलाने के लिए व्यापक रूप से प्रेरित एवं जागरूक करें। बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देश दिए कि प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की सभाएं आयोजित कर ‘फसल अवशेष प्रबंधन की आवश्यकता विषय पर परिचर्चा एवं व्याख्यान आयोजित कराए जाएं। साथ ही निबंध, चित्रकला आदि प्रतियोगिताएं आयोजित कर विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण एवं फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों एवं एफ०पी०ओ० प्रतिनिधियों को निर्देशित किया कि पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य एवं जनहित को ध्यान में रखते हुए फसल अवशेष किसी भी दशा में न जलाएं तथा उपलब्ध कृषि यंत्रों एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर फसल अवशेष प्रबंधन में जिला प्रशासन का सहयोग करें। मुख्य विकास अधिकारी।पवन कुमार मीना ने कहा कि समस्त संबंधित अधिकारी अपने क्षेत्रीय कर्मचारियों के माध्यम से कृषकों को पराली न जलाने के संबंध में जागरूक करें। कृषक उत्पादक संगठनों (एफ०पी०ओ०) की भी जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए निर्देशित किया गया कि वे अपने क्षेत्र के कृषकों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित करें तथा इस अभियान में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। वायु प्रदूषण का प्रभाव हम सभी को झेलना पड़ता है। अतः कृषकों को इस अभियान में आगे आकर सहयोग करना होगा। जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा, परन्तु किसी भी दशा में पराली जलाने की घटना नहीं होनी चाहिए। यदि पराली जलाने की घटना घटित होती है तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार दण्डात्मक कार्यवाई की जाएगी तथा विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाले अनुदान से वंचित किए जाने की कार्रवाई भी की जा सकती है। अतः कृषकों को फसल कटाई के उपरान्त फसल अवशेष न जलाने के लिए जागरूक किया जाए। फसल अवशेष को खेत में उचित प्रबंधन के माध्यम से सड़ाने अथवा मृदा में मिलाने से मृदा की उर्वरता एवं स्वास्थ्य में सुधार होता है तथा पर्यावरण को होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकता है। उप कृषि निदेशक, फतेहपुर द्वारा अवगत कराया गया कि कृषि विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन एवं पराली जलाने से होने वाले दुष्परिणामों के संबंध में जनपद स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर कृषकों को फसल अवशेष न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। जिन ग्राम पंचायतों में विगत वर्षों में पराली जलाने की घटनाएं अधिक हुई हैं, वहां विशेष रूप से जागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं। फसल अवशेष जलाने से होने वाले दुष्परिणामों के प्रति कृषकों को जागरूक करने हेतु प्रत्येक विकास खण्ड, तहसील, मण्डी एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों पर स्थायी होर्डिंग लगाए जाने तथा प्रचार वाहनों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार कराए जाने का कार्य लगातार जारी है। इस मौके पर अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व), जिला विकास अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी सहित एफपीओ व अन्य संबंधित उपस्थित रहे।
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