उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले की साइबर क्राइम पुलिस द्वारा फर्जी बैंक कर्मचारी बनकर लोन देने के नाम पर मैजिक पेन से चेक भरवाकर खाते से रुपये निकालने वाले अन्तर्राज्यीय गिरोह के मुख्य सरगना सहित 02 शातिर 25-25 हजार रुपये के इनामिया आरोप गिरफ्तार, 03 स्मार्टफोन, कूटरचित आधार कार्ड एवं 02 हस्ताक्षरित बैंक चेक बरामद। वादी मुकदमा धीरेन्द्र सिंह, जो प्रिंटिंग प्रेस का व्यापार करते हैं, के मोबाइल पर फर्जी बैंक अधिकारी बनकर सस्ते दर पर लोन देने के नाम पर कॉल की गयी। लोन की प्रक्रिया में वादी के बैंक खाते का स्टेटमेंट प्राप्त कर यह देखा गया कि खाते में धनराशि उपलब्ध है। इसके बाद वादी की दुकान का सर्वे करने के नाम पर दो व्यक्ति पहुंचे6 तथा लोन की प्रक्रिया बताते हुए वादी से बैंक खाते से संबंधित चेक पर हस्ताक्षर कराकर मैजिक पेन से चेक पर वादी के सामने “कैंसिल” लिख दिया। इसके पश्चात आरोपियो द्वारा बैंक जाकर मैजिक पेन से चेक पर लिखा “कैंसिल” शब्द मिटाकर चेक पर ₹1,49,000/- की धनराशि भरकर वादी के खाते से नकद धनराशि आहरित कर ली गयी। प्राप्त तहरीर के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस थाना, जनपद फतेहपुर पर मु0अ0सं0 12/2026 धारा 318(4), 319(2), 338, 61(2) बीएनएस व 66D आईटी एक्ट का अभियोग पंजीकृत किया गया।पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक के निर्देशन में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान में, अपर पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन एवं क्षेत्राधिकारी अपराध के नेतृत्व में साइबर क्राइम थाना पुलिस द्वारा उक्त अभियोग के सफल अनावरण हेतु निरंतर कार्यवाई की जा रही थी। उक्त अभियोग के सफल अनावरण हेतु पुलिस अधीक्षक द्वारा ₹25,000-₹25,000/- का नकद पुरस्कार घोषित किया गया था। दिनांक 04.10.2026 को साइबर क्राइम थाना पुलिस द्वारा अभियुक्त पीयूष शुक्ला को अल्लापुर, थाना जार्जटाउन, जनपद प्रयागराज तथा अभियुक्त अमर सिंह मौर्य को अशोकनगर, थाना कैंट, जनपद प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्तों के कब्जे से 03 अदद स्मार्टफोन, 02 अदद हस्ताक्षरित बैंक चेक एवं कूटरचित आधार कार्ड बरामद हुए। गिरफ्तार आरोपियो के विरुद्ध नियमानुसार अग्रिम विधिक कार्यवाई करते हुए दिनांक 05.10.2026 को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। पूछताछ में अमर सिंह एवं पीयूष द्वारा बताया गया कि वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, शिमला एवं उत्तराखंड आदि स्थानों पर जाकर व्यवसायी वर्ग के व्यक्तियों को चिन्हित करते थे। इसके उपरान्त उनके मोबाइल नम्बर पर सम्पर्क कर बातचीत करते तथा जिन व्यक्तियों को लोन की आवश्यकता होती थी, उन्हें कम ब्याज दर पर लोन उपलब्ध कराने का प्रलोभन देते थे। लोन दिलाने की प्रक्रिया के बहाने वे संबंधित व्यक्ति के बैंक खाते का स्टेटमेंट प्राप्त कर खाते में उपलब्ध धनराशि की जानकारी कर लेते थे। इसके पश्चात लोन की औपचारिकता पूरी करने के नाम पर खाताधारक से मूल चेक पर हस्ताक्षर करा लेते थे। चेक पर ₹149 अथवा ₹199 जैसी छोटी धनराशि अंकित की जाती थी तथा चेक पर लिखी जाने वाली प्रविष्टियों में मैजिक पेन का प्रयोग किया जाता था। इसी प्रकार एक अतिरिक्त हस्ताक्षिरित चेक ले लेते थे फिर उस पर मैजिक पेन से “CANCEL” भी लिख दिया जाता था, जिससे खाताधारक को चेक के दुरुपयोग की आशंका न हो। इसके बाद उक्त चेक को अपने पास लेकर मैजिक पेन से लिखी गई प्रविष्टियों एवं “CANCEL” शब्द को मिटाकर, चेक पर अपनी इच्छानुसार धनराशि अंकित कर बैंक के माध्यम से खाताधारक के खाते से नकद धनराशि आहरित कर लेते थे।
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